उत्तराखंड पुलिस को मिली नई पहचान, नए लोगो और वर्दी में क्या-क्या हुआ बदलाव?

करीब 26 साल बाद पुलिस के ध्येय वाक्य और प्रतीक चिह्न में बदलाव हुआ है। नए ध्वज में हिमालय और नदी की पहचान शामिल है, जबकि विशेष समारोहों के लिए वर्दी को नया स्वरूप दिया गया है।
Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami holding the new Uttarakhand Police flag alongside a display of ceremonial headgear, gloves, sashes and insignia.

देहरादून, 31 अक्टूबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को उत्तराखंड पुलिस के नए ध्वज, लोगो और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण किया। इसके साथ ही पुलिस का 26 साल पुराना ध्येय वाक्य ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ बदलकर ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ कर दिया गया है। पुलिस के नए प्रतीक चिह्न में हिमालय और नदी को भी जगह दी गई है। वहीं, 6 नवंबर को उत्तराखंड पुलिस को ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ सम्मान प्रदान किया जाना है।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस के नए ध्वज, प्रतीक चिह्न, फॉरमेशन साइन, इंसिग्निया, क्रेस्ट और सेरेमोनियल वर्दी का अनावरण किया गया। पहले इस्तेमाल होने वाले तीन रंगों के ध्वज की जगह अब गहरे नीले रंग का ध्वज अपनाया गया है। इसके बीच में पुलिस का नया प्रतीक चिह्न और किनारों पर लाल व सुनहरे रंग की पट्टियां दी गई हैं।

नए प्रतीक चिह्न में अशोक स्तंभ, ‘सत्यमेव जयते’, सुनहरे रंग की पत्तियों से बनी माला, हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। इनमें हिमालय और नदी उत्तराखंड की भौगोलिक पहचान को दर्शाते हैं, जबकि अशोक स्तंभ और ‘सत्यमेव जयते’ राष्ट्रीय प्रतीकों के रूप में शामिल किए गए हैं।

उत्तराखंड पुलिस के पुराने ध्येय वाक्य ‘मित्रता, सेवा, सुरक्षा’ की जगह अब ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ अपनाया गया है। नया ध्येय वाक्य कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और साहस का संदेश देता है। पुलिस का पिछला लोगो और ध्येय वाक्य वर्ष 2000 से इस्तेमाल किया जा रहा था।

पुलिस की सेरेमोनियल वर्दी को भी नया स्वरूप दिया गया है। यह वर्दी विशेष समारोहों और परेड के दौरान पहनी जाती है। इसमें बहुरंगी सैश यानी कंधे से पहनी जाने वाली सजावटी पट्टी, विशेष अलंकरण और अन्य औपचारिक साज-सज्जा शामिल की गई है। हालांकि, पुलिसकर्मियों की नियमित ड्यूटी के दौरान पहनी जाने वाली खाकी वर्दी में बदलाव नहीं किया गया है।

उत्तराखंड पुलिस के पिछले ध्वज का अनावरण 4 अप्रैल 2008 को हुआ था। करीब 18 साल बाद इसे नया स्वरूप दिया गया है। वहीं, लोगो और ध्येय वाक्य में राज्य गठन के लगभग 26 साल बाद बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस के नए स्वरूप को मंजूरी दी थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नए प्रतीक और वर्दी पुलिस की पहचान के साथ उसकी जिम्मेदारियों को भी दर्शाते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों से जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार, निष्पक्ष कार्रवाई और कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम करने की अपेक्षा जताई।

उत्तराखंड पुलिस को आगामी 6 नवंबर को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पुलिस कलर’ सम्मान भी प्रदान किया जाना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस सम्मान को प्रदान करने का कार्यक्रम निर्धारित है। यह सम्मान पुलिस बल की सेवाओं और उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। इस अवसर पर पुलिसकर्मी नई सेरेमोनियल वर्दी में परेड में हिस्सा लेंगे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए पुलिस बल से अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा के मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।

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