रुद्रप्रयाग, 6 नवंबर। पंचकेदारों में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान तुंगनाथ के दर्शन किए। इसके साथ ही इस वर्ष की तुंगनाथ धाम यात्रा का समापन हो गया है। अब भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए आठ नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी।
समुद्रतल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर को कपाट बंद होने के अवसर पर आठ कुंतल फूलों से सजाया गया था। शुक्रवार सुबह मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। मंदिर के पुजारी अभिषेक मैठाणी ने पूजा-अर्चना और परंपरागत अनुष्ठान संपन्न कराए। इसके बाद निर्धारित मुहूर्त में मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार को डोली चोपता में रात्रि विश्राम करेगी। सात नवंबर को डोली चोपता से रवाना होकर भनकुंड पहुंचेगी, जबकि आठ नवंबर को मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में विराजमान होगी।
तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल के दौरान भगवान की पूजा-अर्चना मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में की जाएगी। श्रद्धालु सर्दियों में इसी मंदिर में भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर सकेंगे। ऊंचाई वाले क्षेत्र में अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण हर वर्ष शीतकाल में तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
तुंगनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित पंचकेदारों में तीसरा केदार है। यह रुद्रप्रयाग जिले में चोपता के पास स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चोपता से लगभग साढ़े तीन किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। तुंगनाथ धाम धार्मिक महत्व के साथ हिमालय के प्राकृतिक दृश्यों और चंद्रशिला ट्रेक के लिए भी प्रसिद्ध है।
तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद करने की तारीख विजयदशमी के अवसर पर मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में पंचांग गणना के आधार पर तय की गई थी। इसके बाद छह नवंबर को कपाट बंद करने का कार्यक्रम घोषित किया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार, शीतकाल में भगवान तुंगनाथ की पूजा मक्कूमठ में होती है और अगले यात्रा सत्र में कपाट खुलने के बाद फिर से तुंगनाथ मंदिर में पूजा शुरू होती है।
वहीं, रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ धाम की यात्रा अभी जारी है। केदारनाथ मंदिर के कपाट 11 नवंबर को सुबह साढ़े आठ बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं। इसके बाद भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए 13 नवंबर को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी, जहां शीतकाल में भगवान केदारनाथ की पूजा की जाएगी।
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