आज हम जिस राज्य को उत्तराखंड के नाम से जानते हैं, जब वह 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर भारत का नया राज्य बना, तब उसका आधिकारिक नाम उत्तराखंड नहीं बल्कि ‘उत्तरांचल’ था।
यह बात इसलिए दिलचस्प है क्योंकि अलग राज्य की मांग के दौरान ‘उत्तराखंड’ नाम पहले से प्रचलित था। उत्तराखंड क्रांति दल सहित राज्य आंदोलन से जुड़े संगठनों और आंदोलनकारियों ने इस नाम का लंबे समय तक इस्तेमाल किया था।
फिर जब अलग राज्य बना तो उसका नाम उत्तरांचल क्यों रखा गया? और केवल छह साल बाद इसे बदलकर दोबारा उत्तराखंड क्यों करना पड़ा?
इस सवाल का जवाब उत्तराखंड राज्य आंदोलन, वर्ष 2000 के पुनर्गठन कानून और बाद में हुए राजनीतिक फैसलों में छिपा है।
सबसे पहले समझिए, ‘उत्तराखंड’ नाम नया नहीं था
उत्तराखंड नाम की कहानी वर्ष 2000 से शुरू नहीं होती।
अलग पर्वतीय राज्य की मांग के दौरान ‘उत्तराखंड’ शब्द पहले ही राजनीतिक और क्षेत्रीय पहचान का हिस्सा बन चुका था। 1979 में स्थापित उत्तराखंड क्रांति दल के नाम में भी उत्तराखंड मौजूद था।
आगे चलकर अलग राज्य की मांग तेज हुई तो ‘उत्तराखंड’ आंदोलन की पहचान से और मजबूती से जुड़ गया।
इसलिए आंदोलन से जुड़े बहुत से लोगों के लिए उत्तराखंड केवल किसी क्षेत्र का नाम नहीं था। यह उस अलग पर्वतीय राज्य की परिकल्पना का नाम भी था जिसके लिए वर्षों से संघर्ष चल रहा था।
फिर वर्ष 2000 में ‘उत्तरांचल’ कहां से आया?
इसका सबसे ठोस जवाब हमें उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 (Uttar Pradesh Reorganisation Act, 2000) में मिलता है।
इसी कानून के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 13 जिलों को अलग करके नया राज्य बनाया गया।
अधिनियम की धारा 3 में नए राज्य का नाम स्पष्ट रूप से “State of Uttaranchal” रखा गया।
यानी कानूनी रूप से 9 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए नए राज्य का नाम शुरुआत से ही उत्तरांचल था।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी जरूरी है।
उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम यह बताता है कि नए राज्य का नाम उत्तरांचल होगा, लेकिन अधिनियम में इसका विस्तृत कारण नहीं दिया गया कि आंदोलन में प्रचलित ‘उत्तराखंड’ के बजाय ‘उत्तरांचल’ नाम क्यों चुना गया।
इसलिए यह कहना कि उत्तरांचल नाम किसी एक निश्चित कारण से ही रखा गया था, बिना ठोस आधिकारिक प्रमाण के सही नहीं होगा।
आंदोलन का नाम तो ‘उत्तराखंड’ से जुड़ा था
यही कारण है कि राज्य बनने के बाद नाम को लेकर सवाल उठने लगे।
उत्तराखंड नाम अलग राज्य आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ था। इसका उल्लेख बाद में संसद में हुई चर्चा में भी सामने आया।
वर्ष 2006 में लोकसभा में नाम परिवर्तन विधेयक पर चर्चा के दौरान यह बात उठाई गई कि अलग राज्य का आंदोलन उत्तरांचल नहीं बल्कि उत्तराखंड के नाम से हुआ था।
इससे यह समझना आसान हो जाता है कि उत्तरांचल से उत्तराखंड का नाम परिवर्तन केवल भाषाई बदलाव नहीं था। इसके पीछे राज्य आंदोलन से जुड़ी पहचान भी महत्वपूर्ण थी।
9 नवंबर 2000 को बना ‘उत्तरांचल’
9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ और उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों को अलग करके नया राज्य अस्तित्व में आया।
इसका आधिकारिक नाम था:
उत्तरांचल (Uttaranchal)
देहरादून को इसकी अंतरिम राजधानी बनाया गया और राज्य का नया प्रशासनिक ढांचा काम करने लगा।
इस तरह जिस क्षेत्र के लिए दशकों से अलग राज्य की मांग चल रही थी, उसे आखिरकार राज्य का दर्जा मिल गया, लेकिन नाम वह नहीं था जिससे राज्य आंदोलन की पहचान सबसे अधिक जुड़ी हुई थी।
उत्तराखंड नाम की मांग खत्म नहीं हुई
राज्य बनने के बाद भी ‘उत्तराखंड’ नाम को आधिकारिक रूप से अपनाने की मांग बनी रही।
इसके पीछे एक महत्वपूर्ण तर्क यह था कि उत्तराखंड नाम क्षेत्र के इतिहास, जनभावना और राज्य आंदोलन से पहले से जुड़ा हुआ था।
नाम परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम 5 अक्टूबर 2005 को उठाया गया।
उस दिन तत्कालीन उत्तरांचल विधानसभा ने राज्य का नाम बदलकर उत्तराखंड करने के संबंध में प्रस्ताव पारित किया।
बाद में संसद में इस विषय पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि विधानसभा के प्रस्ताव में राज्य के इतिहास, पौराणिक संदर्भों और आम जनता की भावना के आधार पर ‘उत्तराखंड’ नाम अपनाने की बात कही गई थी।
इसके बाद केंद्र सरकार ने नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
संसद तक पहुंचा उत्तराखंड नाम
राज्य का नाम बदलने के लिए केवल राज्य सरकार का फैसला पर्याप्त नहीं था।
इसके लिए संसद में कानून बनाना आवश्यक था।
इसके बाद संसद ने The Uttaranchal (Alteration of Name) Act, 2006 पारित किया।
इस कानून का उद्देश्य ही था:
उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड करना।
इस अधिनियम को 21 दिसंबर 2006 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।
इसके साथ संविधान की First Schedule और Fourth Schedule सहित जहां आवश्यक था, वहां Uttaranchal की जगह Uttarakhand करने का कानूनी प्रावधान किया गया।
1 जनवरी 2007 को उत्तरांचल बना उत्तराखंड
नाम परिवर्तन 1 जनवरी 2007 से प्रभावी हुआ।
इसके बाद भारत के नक्शे और सरकारी दस्तावेजों में Uttaranchal आधिकारिक रूप से Uttarakhand यानी उत्तराखंड बन गया।
इस तरह 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल के नाम से अस्तित्व में आया राज्य करीब छह साल बाद उस नाम से पहचाना जाने लगा जो अलग राज्य आंदोलन से पहले से जुड़ा हुआ था।
तो आखिर उत्तरांचल नाम क्यों रखा गया था?
यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
इसका तथ्यात्मक उत्तर थोड़ा अलग है।
वर्ष 2000 के उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम ने नए राज्य का नाम ‘उत्तरांचल’ निर्धारित किया था, लेकिन उसी कानून में यह विस्तृत कारण दर्ज नहीं है कि ‘उत्तराखंड’ के बजाय ‘उत्तरांचल’ नाम क्यों चुना गया।
इसलिए इसके पीछे किसी एक राजनीतिक या सांस्कृतिक कारण को निश्चित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
हम दस्तावेजों के आधार पर इतना निश्चित रूप से कह सकते हैं कि:
‘उत्तराखंड’ नाम राज्य आंदोलन से पहले ही जुड़ चुका था, जबकि वर्ष 2000 में बने नए राज्य को कानून के माध्यम से ‘उत्तरांचल’ नाम दिया गया। राज्य बनने के बाद उत्तराखंड नाम की मांग जारी रही और अंततः राज्य विधानसभा के प्रस्ताव तथा संसद द्वारा बनाए गए कानून के बाद 1 जनवरी 2007 से उत्तराखंड आधिकारिक नाम बन गया।
उत्तरांचल से उत्तराखंड बनने की कहानी केवल छह साल बाद राज्य का नाम बदल देने की कहानी नहीं है।
इसके पीछे उत्तराखंड राज्य आंदोलन की एक लंबी विरासत दिखाई देती है।
जिस ‘उत्तराखंड’ नाम के साथ अलग राज्य की मांग दशकों तक आगे बढ़ी, राज्य बनने के समय वह आधिकारिक नाम नहीं बन पाया। लेकिन राज्य बनने के बाद भी उस नाम की मांग समाप्त नहीं हुई।
आखिरकार 2007 में उत्तराखंड आधिकारिक नाम बन गया।
इसीलिए आज जब हम ‘उत्तराखंड’ कहते हैं, तो यह केवल भारत के एक राज्य का नाम नहीं है। इसके साथ उस अलग राज्य की पहचान और आंदोलन का इतिहास भी जुड़ा हुआ है, जिसके लिए पहाड़ के लोगों ने वर्षों तक संघर्ष किया।
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