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Illustrated comparison of a Uttarakhand mountain village and a modern city representing different dimensions of development.

क्या पहाड़ सच में शहरों से पीछे हैं? विकास को आखिर मापा कैसे जाता है?

रोजगार, अस्पताल और उच्च शिक्षा की कमी पहाड़ की वास्तविक चुनौतियां हैं, लेकिन विकास की पूरी तस्वीर केवल आय और सुविधाओं से नहीं बनती। जंगल, पानी, जैव विविधता और जीवन की गुणवत्ता जैसे सवाल भी सामने आते हैं – और यहीं से यह बहस बदलने लगती है कि आखिर किसे विकसित माना जाए।

Historical Uttarakhand statehood movement imagery combined with the Bhararisain assembly complex representing the demand to make Gairsain the capital.

उत्तराखंड राज्य आंदोलन में गैरसैंण को ही राजधानी बनाने की मांग क्यों उठी?

गैरसैंण की मांग के पीछे केवल उसकी भौगोलिक स्थिति नहीं थी। इसके साथ गढ़वाल-कुमाऊँ के बीच संतुलन, पहाड़ में प्रशासनिक गतिविधियों का विस्तार और राज्य निर्माण के मूल उद्देश्य जैसी कई परतें जुड़ी थीं। लेकिन राज्य बनने के बाद भी गैरसैंण स्थायी राजधानी क्यों नहीं बन सका, और 2020 में इसे क्या दर्जा मिला…

Editorial visual showing the transition from Uttaranchal to Uttarakhand on a mountain sign

उत्तराखंड का पहला नाम ‘उत्तरांचल’ क्यों रखा गया था?

1979 से आंदोलन की पहचान में मौजूद ‘उत्तराखंड’ नाम राज्य बनने के समय आधिकारिक नहीं था। छह साल बाद विधानसभा के प्रस्ताव और संसद के कानून से वही नाम वापस आया। इस बदलाव के पीछे पूरी कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया क्या थी?

Composite historical image of Indramani Badoni with Uttarakhand mountains and statehood movement scenes

इंद्रमणि बडोनी: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के जननायक और ‘पर्वतीय गांधी’

105 दिनों की ऐतिहासिक पदयात्रा, गैरसैंण को लेकर उनकी दूरदर्शी सोच और 1994 का आमरण अनशन उनके संघर्ष के अहम पड़ाव रहे। इन घटनाओं ने पहाड़ की राजनीति और जनभावनाओं पर क्या असर डाला? पूरी कहानी पढ़ें।

A memorial graphic featuring mountaineer NIMS DAI alongside the names and portraits of climbers who lost their lives following the Broad Peak avalanche in Pakistan.

विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही NIMS DAI का ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में निधन, पर्वतारोहण जगत में शोक

NIMS DAI की मौत ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन में हुई, जहाँ खराब मौसम और अत्यधिक ऊँचाई के कारण बचाव अभियान भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उनकी असाधारण उपलब्धियों और साहसिक अभियानों ने उन्हें वैश्विक पर्वतारोहण समुदाय की प्रेरणादायक पहचान बनाया।

A Himalayan landscape in Uttarakhand showing a dense forest alongside road construction and hillside development, illustrating the balance between nature and infrastructure.

जंगलों के बिना कैसा कल?

जंगलों की असली कीमत लकड़ी से नहीं, बल्कि उन अनदेखे रिश्तों से तय होती है जो पानी, मिट्टी, वन्यजीव और इंसानी जीवन को जोड़ते हैं। इस लेख के माध्यम से समझिए कि जंगलों का सवाल आखिर भविष्य का सवाल क्यों बनता जा रहा है।

A lone bird flies above an old house and surrounding urban neighbourhood, highlighting the contrast between traditional nesting spaces and expanding city development.

जब पक्षी शहर छोड़ देते हैं

किसी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों और सड़कों से नहीं होती, बल्कि उन जीवों से भी होती है जो बिना किसी मजबूरी के वहाँ रहना चुनते हैं। जब पक्षी किसी जगह को छोड़ने लगते हैं, तो यह बदलते पर्यावरण और जीवन-चक्र का एक मौन संकेत बन जाता है। आखिर यह बदलाव क्यों हो रहा है और हमें इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए? समझिए…

A night view of an illuminated valley in Uttarakhand where city lights outshine the natural night sky, leaving only a few stars visible.

क्या शहरों ने रात छीन ली है?

शहरों की बढ़ती कृत्रिम रोशनी ने रात को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित तो बनाया है, लेकिन इसी बदलाव ने तारों भरे आकाश, प्राकृतिक अंधकार और अनेक जीवों के जीवनचक्र पर गहरा असर भी डाला है। प्रकाश प्रदूषण हमारे पर्यावरण, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के अनुभव को किस तरह बदल रहा है, इस लेख के माध्यम से समझिए।

A woman preparing food in a home kitchen while other family members continue their morning routine in the background.

खाना बनाती स्त्रियाँ : हर थाली के पीछे का अनदेखा श्रम

कुछ चीज़ें इतनी नियमित, इतनी स्वाभाविक और इतनी रोज़मर्रा की हो जाती हैं कि एक समय बाद वे दिखाई देना बंद हो जाती हैं। शायद इसलिए हम उनका महत्व तब समझते हैं, जब किसी दिन ठहरकर उन्हें नए सिरे से देखने का अवसर मिलता है। यह लेख ऐसे ही एक अनुभव, एक कविता और हमारे घरों की उस अनकही दुनिया तक ले जाता है, जो हर दिन हमारे सामने होती है, लेकिन अक्सर दिखाई नहीं देती।

A man sitting quietly by a window in his home, reflecting on the emotional responsibilities of being a father, husband, son and brother.

एक बाप, एक पति, एक बेटा और एक भाई

घर के कई रिश्तों के बीच एक पुरुष अक्सर सबकी बातें सुनता है, लेकिन अपनी बात पूरी तरह कह नहीं पाता। जिम्मेदारियों, उम्मीदों और रिश्तों के इस संतुलन में उसकी चुप्पी कैसे बनती है उसकी सबसे बड़ी आवाज़, समझिए इस लेख में।