देहरादून-पांवटा साहिब हाईवे का कार्य अंतिम चरण में, 35 मिनट में पूरा होगा सफर

देहरादून से पांवटा साहिब की तरफ अक्सर सफर करने वालों ने इस रास्ते की धीमी रफ्तार और लंबा समय दोनों महसूस किया है। अब इसी रूट को लेकर एक ऐसा बदलाव सामने आ रहा है, जिसका असर रोजमर्रा की आवाजाही पर साफ दिख सकता है।
देहरादून-पांवटा साहिब हाईवे का हवाई दृश्य

देहरादून-पांवटा साहिब 4-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब ₹1650 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे इस हाईवे के शुरू होने के बाद देहरादून और पांवटा साहिब के बीच सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि पांवटा साहिब-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग का काम अंतिम चरण में है। यह हाईवे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करेगा।

जानकारी के अनुसार, इस हाईवे की कुल लंबाई करीब 44.8 Km है। अभी देहरादून से पांवटा साहिब पहुंचने में करीब पौने 2 घंटे का समय लगता है। हाईवे शुरू होने के बाद यह सफर लगभग 35 मिनट में पूरा होने की संभावना जताई गई है।

यह मार्ग हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से शुरू होकर सेलाकुई और प्रेमनगर होते हुए देहरादून के बल्लूपुर चौक तक पहुंचेगा। जानकारी के अनुसार, परियोजना का 95% से अधिक काम पूरा हो चुका है।

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यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए हाईवे पर कई अहम निर्माण कार्य किए गए हैं। यमुना नदी पर 1.17 Km लंबा पुल बनाया गया है। प्रेमनगर क्षेत्र में अंडरपास और फ्लाईओवर भी बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय यातायात को राहत मिलने की उम्मीद है।

इस हाईवे से देहरादून, सेलाकुई और पांवटा साहिब के बीच आवाजाही आसान होगी। औद्योगिक क्षेत्रों के बीच माल परिवहन तेज होने के साथ आम यात्रियों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा झाझरा क्षेत्र से पांवटा साहिब-बल्लूपुर हाईवे को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ने के लिए 12 Km लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड बाइपास अलग से बनाया जा रहा है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार, इस बाइपास की लागत ₹716 करोड़ है और इसका 44% काम पूरा हो चुका है।

मुख्य हाईवे और इससे जुड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देहरादून, सेलाकुई, पांवटा साहिब और आसपास के क्षेत्रों में यातायात, औद्योगिक संपर्क और पर्यटन गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

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