देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में एक नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राज्य में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के जरिए डॉक्टर से परामर्श लेने वाले मरीजों को अब मुफ्त दवाएं डाक के माध्यम से घर तक भेजी जाएंगी। व्यवस्था लागू होने पर उत्तराखंड सरकारी स्वास्थ्य सेवा के तहत डाक से मुफ्त दवा पहुंचाने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है।
इस पहल का सबसे अधिक लाभ दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को मिलने की उम्मीद है। पहाड़ के कई गांवों में अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मौसम, सड़क और परिवहन की दिक्कतों के कारण कई बार मरीज समय पर दवा नहीं ले पाते। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बाद दवा सीधे घर पहुंचने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी कम हो सकती है।
उत्तराखंड में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा पहले से संचालित है। इसके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीज एम्स ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों, आयुष हब और होम्योपैथी हब से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श ले सकते हैं। एनएचएम(National Health Mission) उत्तराखंड के अनुसार, यह सेवा सोमवार से शनिवार सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध है।
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अब इसी व्यवस्था को दवा आपूर्ति से जोड़ने की तैयारी है। डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श के बाद मरीज को जो दवा लिखी जाएगी, उसे डाक के जरिए मरीज के पते पर भेजा जा सकेगा। इससे खासकर बुजुर्गों, नियमित दवा लेने वाले मरीजों और दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा चुनौतीपूर्ण रही हैं। कई क्षेत्रों में नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में टेलीमेडिसिन और घर तक दवा पहुंचाने की व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत कर सकती है।
सरकार की कोशिश है कि मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा अधिक आसान और उपयोगी बन सकती है।
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