हरिद्वार: अर्द्धकुंभ 2027 से पहले हरिद्वार की यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एनएचएआई (NHAI) से जुड़ी दो सड़क परियोजनाओं पर काम तेज किया गया है। इनमें हरिद्वार को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी और हरिद्वार बाईपास शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हरिद्वार में बाहरी वाहनों का दबाव कम होने और श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
हरिद्वार में अर्द्धकुंभ, कांवड़ यात्रा और बड़े स्नान पर्वों के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे समय में शहर के भीतर हरकी पैड़ी, चंडी चौक, शंकराचार्य चौक, सिंहद्वार, ज्वालापुर और अन्य प्रमुख मार्गों पर यातायात दबाव बढ़ जाता है। इसी दबाव को कम करने के लिए शहर के आसपास वैकल्पिक सड़क संपर्क और बाईपास व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
पहली महत्वपूर्ण परियोजना हरिद्वार स्पर (Haridwar Spur) है। यह हरिद्वार को दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ेगी। इस मार्ग के बनने से दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों से हरिद्वार आने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इससे पुराने मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होने और हरिद्वार तक पहुंचने में समय बचने की उम्मीद है।

प्रोजेक्ट से जुड़े विवरण के अनुसार, हरिद्वार स्पर की लंबाई करीब 50.70 किलोमीटर है। यह परियोजना उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से जुड़े सड़क नेटवर्क का हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद हरिद्वार आने-जाने वाले तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बड़ी सुविधा मिल सकती है।
दूसरी अहम परियोजना हरिद्वार बाईपास से जुड़ी है। इसका उद्देश्य बाहरी वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों में प्रवेश किए बिना आगे निकालना है। खासकर बड़े धार्मिक आयोजनों के समय यह बाईपास ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ प्रबंधन में मददगार साबित हो सकता है।
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बहादराबाद-श्यामपुर बाईपास और वैकल्पिक मार्गों को भी अर्द्धकुंभ की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि बाहर से आने वाले वाहनों को जरूरत के अनुसार पार्किंग, बाईपास और वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया जाए, ताकि शहर के प्रमुख घाटों और बाजार क्षेत्रों में अनावश्यक दबाव न बढ़े।

इन सड़क परियोजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों को भी मिल सकता है। हरिद्वार में बाहर से आने वाले वाहनों के कारण कई बार सामान्य आवाजाही प्रभावित होती है। बाईपास और बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से स्थानीय बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और घाटों के आसपास जाम की समस्या कम हो सकती है।
अर्द्धकुंभ 2027 को देखते हुए हरिद्वार में सड़क, पार्किंग, घाट, सफाई, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े स्नान पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है।

हरिद्वार उत्तराखंड के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में शामिल है। यहां हर साल कांवड़ यात्रा, गंगा दशहरा, सोमवती अमावस्या और अन्य पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अर्द्धकुंभ जैसे आयोजन के समय यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में शहर की सड़क व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल इन परियोजनाओं को अर्द्धकुंभ से पहले यातायात राहत की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इनके पूरा होने के बाद दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से हरिद्वार की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और शहर को बाईपास मार्ग का लाभ मिलेगा। इससे हरिद्वार में श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान होने और जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।
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