देहरादून: उत्तराखंड में गोल्डन कार्ड योजना का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। अब प्रदेश सरकार से अनुदानित संस्थाओं के कर्मचारियों और पेंशनरों को भी अंशदान के आधार पर कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सकेगी। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति ने इस व्यवस्था को मंजूरी दे दी है।
इस फैसले से उन कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों को राहत मिलेगी, जो अब तक गोल्डन कार्ड योजना की सुविधा से बाहर थे। नई व्यवस्था के तहत अनुदानित संस्थाओं के साथ स्वायत्तशासी निकायों, निगमों, प्राधिकरणों और विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों व पेंशनरों को भी योजना से जोड़ा जा सकेगा।
योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित संस्था को अपने सक्षम निकाय या बोर्ड से प्रस्ताव पारित कराना होगा। प्रस्ताव पारित होने के बाद संस्था को यह तय करना होगा कि वह अपने पात्र कर्मचारियों और पेंशनरों को अंशदान आधारित गोल्डन कार्ड व्यवस्था से जोड़ेगी।
व्यवस्था लागू होने के बाद संबंधित संस्था के पात्र कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन या पेंशन से निर्धारित अंशदान की कटौती की जाएगी। यह अंशदान राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड जारी किए जाएंगे।
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सेवारत कर्मचारियों के लिए छह महीने या एक वर्ष का एकमुश्त अंशदान (Lump Sum Contribution) जमा करने का विकल्प रखा गया है। वहीं पेंशनरों के लिए एक वर्ष या 10 वर्ष का एकमुश्त अंशदान जमा करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे संस्था और लाभार्थी अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे।
गोल्डन कार्ड जारी होने के बाद लाभार्थी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार करा सकेंगे। गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में यह सुविधा कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों पर अचानक आने वाले आर्थिक बोझ को कम कर सकती है।
उत्तराखंड में गोल्डन कार्ड योजना पहले से राजकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए लागू है। अब इसका दायरा बढ़ने से अनुदानित और सरकारी सहयोग प्राप्त संस्थाओं से जुड़े कर्मचारियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
हालांकि योजना का लाभ तुरंत अपने आप नहीं मिलेगा। इसके लिए संबंधित संस्थाओं को पहले औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रस्ताव पारित होने, अंशदान व्यवस्था शुरू होने और सत्यापन के बाद ही कर्मचारियों और पेंशनरों को गोल्डन कार्ड जारी किए जाएंगे।
स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ने के दौर में यह फैसला कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अहम माना जा रहा है। अगर संस्थाएं समय पर प्रक्रिया पूरी करती हैं, तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों और पेंशनरों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सकती है।
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