पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुके करीब 200 निहंग, कर्णप्रयाग प्रकरण में 48 घंटे में कार्रवाई की मांग

कर्णप्रयाग प्रकरण को लेकर फिलहाल उत्तराखंड कूच टल गया है, लेकिन मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। प्रशासन और निहंग पक्ष के बीच आगे क्या होता है और 48 घंटे की समयसीमा के बाद स्थिति किस दिशा में जाती है, पूरी जानकारी खबर में पढ़ें।
Night-time scene showing Nihang group members near police barricading at the Uttarakhand-Himachal Pradesh border checkpoint.

देहरादून: कर्णप्रयाग प्रकरण को लेकर उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर पुलिस और प्रशासन अब भी सतर्क है। पुलिस-प्रशासन के अनुसार, वार्ता के बाद निहंग जत्थे ने फिलहाल उत्तराखंड कूच रोक दिया है। करीब 200 निहंग पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुके हुए हैं। दूसरी ओर कुल्हाल बॉर्डर और देहरादून के कुछ संवेदनशील इलाकों में पुलिस और आईटीबीपी की निगरानी जारी है।

मांगों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को 48 घंटे का समय दिया गया है। अगर मांगों पर संतोषजनक कदम नहीं उठता है, तो निहंग पक्ष आगे की रणनीति तय कर सकता है। प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

यह पूरा मामला 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुए विवाद से जुड़ा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे कुछ निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच पार्किंग को लेकर कहासुनी हुई थी। बात बढ़ने के बाद मामला झड़प तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर चार निहंगों को गिरफ्तार किया था। इसी गिरफ्तारी को लेकर निहंग पक्ष लगातार आपत्ति जता रहा है।

कर्णप्रयाग प्रकरण के बाद रुद्रप्रयाग जिले के नागरासू गुरुद्वारे में भी विवाद सामने आया। वहां कुछ निहंगों के ठहरने और विरोध को लेकर कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। बाद में पंजाब से आए प्रतिनिधियों और प्रशासन की बातचीत के बाद स्थिति शांत हुई और गुरुद्वारे से निहंगों को बाहर निकाला गया। इस घटनाक्रम के बाद मामला और संवेदनशील हो गया था।

इसके बाद पंजाब और हिमाचल से निहंग जत्थे के उत्तराखंड आने की सूचना पर कुल्हाल बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। गुरुवार रात कुछ निहंग बैरिकेडिंग पार कर देहरादून की ओर बढ़े थे। पुलिस और प्रशासन ने उन्हें समझाने के लिए कई दौर की वार्ता की। बातचीत के बाद जत्थे को पांवटा साहिब की ओर लौटाया गया। फिलहाल पांवटा साहिब गुरुद्वारे में करीब 200 निहंग रुके हुए हैं।

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सीमा क्षेत्र में पुलिस की तैनाती इसलिए भी बढ़ाई गई है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। कुल्हाल बॉर्डर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला अहम मार्ग है। यहां से देहरादून की ओर आवाजाही होती है। ऐसे में प्रशासन किसी भी तरह के तनाव को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता। पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

कर्णप्रयाग मामले की जांच को लेकर भी कार्रवाई आगे बढ़ी है। जानकारी के अनुसार, मामले की जांच चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर की गई है, ताकि जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। निहंग पक्ष की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता बनी हुई है। कर्णप्रयाग और नागरासू दोनों जगहों पर हुई घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि एक तरफ धार्मिक भावनाओं और यात्रा से जुड़े पक्षों को शांत रखा जाए, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था भी बनी रहे।

फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने सतर्कता कम नहीं की है। पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुके निहंगों और प्रशासन के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश हो रही है। कुल्हाल बॉर्डर पर निगरानी जारी है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि पूरा मामला बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के तहत शांतिपूर्वक सुलझे।

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