सिलक्यारा-बड़कोट टनल अब बाबा बौखनाग महाराज के नाम से जानी जाएगी

सिलक्यारा टनल को नया नाम दिए जाने की प्रक्रिया ने स्थानीय आस्था और क्षेत्रीय पहचान को फिर चर्चा में ला दिया है। यह नामकरण स्थानीय लोगों के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है और इसके पीछे क्या वजह है, जानिए।
Baba Baukhnag temple located near the Silkyara Tunnel in Uttarkashi, Uttarakhand.

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले की सिलक्यारा-बड़कोट टनल का नाम स्थानीय लोकदेवता बाबा बौखनाग महाराज के नाम पर रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। यह सुरंग यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही है और चारधाम महामार्ग परियोजना का अहम हिस्सा है। स्थानीय लोगों के लिए यह नामकरण केवल एक परियोजना का नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि आस्था और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा विषय है।

सिलक्यारा-बड़कोट टनल करीब 4.531 किलोमीटर लंबी दो-लेन द्विदिश(Bidirectional) सुरंग है। यह धरासू-यमुनोत्री सेक्शन पर राष्ट्रीय राजमार्ग-134 पर बनाई जा रही है। सुरंग तैयार होने के बाद धरासू से यमुनोत्री की दूरी करीब 20 किलोमीटर और यात्रा समय लगभग एक घंटा कम होने की उम्मीद है।

इस सुरंग का नाम बाबा बौखनाग महाराज से जोड़ने की मांग 2023 के हादसे के बाद और मजबूत हुई थी। 12 नवंबर 2023 को निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा धंसने से 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। इसके बाद 17 दिन तक बचाव अभियान चला और सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान बाबा बौखनाग महाराज का नाम लगातार चर्चा में रहा। स्थानीय लोगों की आस्था है कि बाबा बौखनाग इस क्षेत्र के रक्षक देवता हैं। हादसे के बाद सुरंग के पास बाबा बौखनाग का मंदिर भी बनाया गया था और बचाव अभियान के दौरान वहां पूजा-अर्चना भी की गई थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिलक्यारा टनल के ब्रेकथ्रू कार्यक्रम के दौरान कहा था कि टनल का नाम बाबा बौखनाग महाराज के नाम पर रखने की कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने 41 श्रमिकों के सुरक्षित बचाव को बाबा बौखनाग महाराज की कृपा और बचाव दलों की मेहनत से जोड़ा था।

यह भी पढ़ें: पिथौरागढ़ में 3 अगस्त से टेरिटोरियल आर्मी की भर्ती रैली, 69 पदों पर होगा चयन

सिलक्यारा-बड़कोट टनल चारधाम यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद यमुनोत्री धाम की यात्रा अधिक सुगम होने की उम्मीद है। साथ ही उत्तरकाशी जिले के कई क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिल सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा बौखनाग महाराज इस क्षेत्र की लोक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में सुरंग का नाम उनके नाम पर रखे जाने से स्थानीय परंपरा और आधुनिक विकास, दोनों को एक साथ जोड़ने का संदेश जाएगा।

सिलक्यारा टनल 2023 के हादसे और 41 श्रमिकों के सफल रेस्क्यू के कारण देशभर में चर्चा में आई थी। अब बाबा बौखनाग महाराज के नाम से जुड़ने की प्रक्रिया ने इस परियोजना को उत्तराखंड की लोक आस्था, सामूहिक स्मृति और चारधाम मार्ग के विकास से जोड़ दिया है।

बाबा बौखनाग महाराज उत्तरकाशी क्षेत्र के स्थानीय लोकदेवता हैं। स्थानीय लोग उन्हें क्षेत्र का रक्षक देवता और ईष्ट देवता मानते हैं। मान्यता है कि बाबा बौखनाग नाग देवता से जुड़े हैं और इस क्षेत्र की लोक आस्था में उनका विशेष स्थान है।

यह भी पढ़ें: चंपावत में 124 करोड़ की विकास परियोजनाओं की शुरुआत, मुख्यमंत्री धामी ने किया लोकार्पण और शिलान्यास

हर दिन की अहम खबरें, जनहित के मुद्दों और जरूरी अपडेट का सीधा रैबार। राज्य, नीति, विकास, प्रशासन, विकास, मौसम, स्वास्थ्य और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरें।