श्रीनगर गढ़वाल, 5 जुलाई 2026। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय एक बार फिर चौरास परिसर से जुड़े मामले को लेकर चर्चा में है। टिहरी जिला खनन विभाग ने विश्वविद्यालय को 9.90 करोड़ रुपये का वसूली नोटिस जारी किया है। यह मामला चौरास परिसर के स्टेडियम में भरान के लिए डंप किए गए मलबे से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2020-21 में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से लाया गया था।
चौरास परिसर का स्टेडियम वर्ष 2013 की आपदा के दौरान अलकनंदा नदी के तेज कटाव से क्षतिग्रस्त हो गया था। नदी के कटाव से स्टेडियम और परिसर के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद परिसर की सुरक्षा और स्टेडियम क्षेत्र की पुनर्बहाली के लिए भरान कार्य की जरूरत पड़ी। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने रेल विकास निगम लिमिटेड से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सुरंगों से निकला मलबा परिसर में डंप कराया था।
खनन विभाग ने इसी मलबे को खनिज परिवहन के दायरे में माना है। विभाग का कहना है कि मलबा लाए जाने के बाद उस पर नियमानुसार रॉयल्टी देय थी। विभाग की ओर से विश्वविद्यालय को पहले करीब 2.50 करोड़ रुपये की रॉयल्टी जमा करने के लिए कहा गया था। कई बार पत्राचार के बाद भी राशि जमा नहीं होने पर अब पांच गुना जुर्माने सहित 9.90 करोड़ रुपये का वसूली नोटिस जारी किया गया है।
विभाग का पक्ष है कि चाहे मलबे का उपयोग भरान के लिए किया गया हो, लेकिन उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाया गया। ऐसे में यह खनिज परिवहन की श्रेणी में आता है और इस पर रॉयल्टी लागू होती है। विभाग अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहा है।
वहीं, विश्वविद्यालय का पक्ष इससे अलग है। विश्वविद्यालय का कहना है कि मलबा किसी व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं लाया गया था। इसे न तो बेचा गया और न ही किसी निर्माण से लाभ कमाने के लिए इस्तेमाल किया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह मलबा आपदा से क्षतिग्रस्त परिसर की सुरक्षा, स्टेडियम क्षेत्र के भरान और पुनर्बहाली के उद्देश्य से डंप कराया गया था।
विश्वविद्यालय का तर्क है कि 2013 की आपदा के बाद चौरास परिसर को बचाना जरूरी था। स्टेडियम क्षेत्र में भरान से परिसर की सुरक्षा और उपयोगिता बहाल करने की कोशिश की गई। ऐसे में विश्वविद्यालय रॉयल्टी की मांग को उचित नहीं मान रहा है।
मामला अब खनिज रॉयल्टी और आपदा से क्षतिग्रस्त परिसर की सुरक्षा के लिए किए गए भरान कार्य के बीच विवाद के रूप में सामने आया है। एक ओर खनन विभाग नियमों के आधार पर वसूली नोटिस जारी कर चुका है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय इसे गैर-व्यावसायिक और सार्वजनिक हित से जुड़ा कार्य बता रहा है।
चौरास परिसर गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण परिसर है। यहां शैक्षणिक गतिविधियों के साथ खेल और अन्य कार्यक्रमों के लिए भी बुनियादी ढांचा विकसित किया गया था। 2013 की आपदा के बाद स्टेडियम को हुए नुकसान ने परिसर की सुरक्षा और उपयोग को प्रभावित किया था।
फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद विश्वविद्यालय और खनन विभाग के बीच इस मामले पर आगे की प्रक्रिया तय होनी है। विश्वविद्यालय की ओर से नोटिस का जवाब दिया जा सकता है, जबकि विभाग बकाया रॉयल्टी और जुर्माने की वसूली को लेकर अपने स्तर से कार्रवाई आगे बढ़ा सकता है। मामले का अंतिम समाधान विभागीय प्रक्रिया और विश्वविद्यालय के जवाब के बाद ही साफ होगा।
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