ऋषिकेश एम्स के डॉक्टरों ने हटाया 34.7 किलो का बोन ट्यूमर, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई उपलब्धि

एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों ने 34.7 किलो का बोन ट्यूमर सफलतापूर्वक हटाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई है। यह उपलब्धि उत्तराखंड की चिकित्सा विशेषज्ञता और जटिल सर्जरी की नई पहचान बनकर सामने आई है।
AIIMS Rishikesh doctors with Guinness World Records certificates after the largest bone tumor surgery achievement

ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने 27 वर्षीय मरीज की बाईं जांघ की हड्डी से 34.7 किलो का बोन ट्यूमर हटाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है। यह जटिल सर्जरी 9 जून 2025 को की गई थी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसे ‘Largest bone tumor’ के रूप में दर्ज किया गया है।

संस्थान के अनुसार, एम्स ऋषिकेश की शल्य चिकित्सकों की टीम ने मरीज के बाएं पैर की जांघ से करीब 35 किलो वजन का भारी ट्यूमर सर्जरी के जरिए हटाया था। इस उपलब्धि के लिए चिकित्सकीय टीम को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से प्रशस्तिपत्र भी दिया गया है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक एंट्री के अनुसार, यह रिकॉर्ड सलमान मोहम्मद के नाम दर्ज है। ट्यूमर malignant bone tumor था और इसे मरीज की left femur यानी बाईं जांघ की हड्डी से हटाया गया। मरीज की उम्र 27 वर्ष बताई गई है।

मोहम्मद सलमान उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रहने वाले हैं। वह कई वर्षों से इस बीमारी से जूझ रहे थे। शुरुआत में जांघ के पास सूजन की समस्या थी, लेकिन समय के साथ ट्यूमर का आकार बढ़ता गया। पिछले कुछ महीनों में स्थिति गंभीर हो गई और मरीज की चलने-फिरने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई।

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चिकित्सकों के लिए यह सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। ट्यूमर का आकार और वजन इतना अधिक था कि जांच और ऑपरेशन की योजना बनाना भी आसान नहीं था। सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने ट्यूमर में रक्त आपूर्ति और उससे जुड़ी जटिलताओं को समझने के लिए जरूरी जांचें कीं, ताकि ऑपरेशन के दौरान जोखिम कम किया जा सके।

इस सर्जरी में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित धींगरा, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अंशुमान दरबारी और बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुवरी वाथुल्या की भूमिका रही। अलग-अलग विशेषज्ञ विभागों के समन्वय से यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।

सर्जरी के बाद एम्स ऋषिकेश की ओर से इस उपलब्धि की जानकारी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को भेजी गई थी। रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों का परीक्षण किए जाने के बाद इसे आधिकारिक मान्यता दी गई। इसके बाद एम्स ऋषिकेश की टीम को प्रमाणपत्र जारी किया गया।

एम्स ऋषिकेश की निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इसे संस्थान और देश के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान मरीजों को सर्वोत्तम और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इससे पहले वर्ष 2002 में भारत में 16.5 किलो के बोन ट्यूमर की सर्जरी का रिकॉर्ड दर्ज था। एम्स ऋषिकेश की टीम ने उससे लगभग दोगुने वजन का ट्यूमर हटाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि उत्तराखंड के चिकित्सा संस्थानों की क्षमता और जटिल सर्जरी में विशेषज्ञ टीमवर्क का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।

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