देहरादून महायोजना-2041 पर जनसुनवाई, मेट्रो-नए टाउनशिप और भूकंप सुरक्षा से जुड़े सुझाव आए सामने

महायोजना-2041 पर मिले सुझाव आने वाले समय में देहरादून के विकास और शहरी सुविधाओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आखिर किन प्रस्तावों का शहर पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, जानिए...
Citizens and officials reviewing documents during the Dehradun Master Plan 2041 public hearing at the Municipal Town Hall in Dehradun.

देहरादून। देहरादून महायोजना-2041 को लेकर चल रही सेक्टरवार जनसुनवाई के तहत गुरुवार को नगर निगम टाउन हॉल में सेक्टर-4 की बैठक आयोजित हुई। इसमें शहर के बढ़ते यातायात दबाव, अनियोजित विस्तार, घटते हरित क्षेत्रों, जलभराव और भूकंप सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नागरिकों और संगठनों ने अपने सुझाव रखे।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की ओर से महायोजना क्षेत्र से जुड़ी आपत्तियों और सुझावों को सुनने के लिए अलग-अलग सेक्टरों में बैठकें की जा रही हैं। यह प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू हुई थी और 21 जुलाई तक चलनी है। पहले दिन सेक्टर-1 की बैठक में 18 सुझाव और आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

सेक्टर-4 की बैठक में संयुक्त नागरिक संगठन ने देहरादून को ऋषिकेश, हरिद्वार और विकासनगर से मेट्रो सेवा के माध्यम से जोड़ने का सुझाव दिया। संगठन ने कहा कि बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए शहर के लिए मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था जरूरी है।

बैठक में शहर के बाहर प्राधिकरण और आवास विकास विभाग के माध्यम से नए टाउनशिप या सैटेलाइट टाउन विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। नागरिकों का कहना था कि बढ़ती आबादी, आवासीय जरूरतों और व्यावसायिक गतिविधियों का पूरा दबाव मुख्य शहर पर नहीं पड़ना चाहिए।

जनसुनवाई में प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त पार्किंग, बस स्टॉप, बाईपास मार्ग, छोटे पार्क, चौड़े फुटपाथ और जहां संभव हो साइकिल ट्रैक विकसित करने की मांग भी रखी गई। लोगों ने कहा कि शहर की धारण क्षमता को ध्यान में रखकर ही नए स्कूल, कॉलेज और बड़े भवनों को मंजूरी दी जानी चाहिए।

राजपुर और आसपास के भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों में बहुमंजिला भवनों के निर्माण को नियंत्रित करने का सुझाव भी बैठक में सामने आया। नागरिक संगठनों ने ऐसे क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए विशेष मानक तय करने और बड़े निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी की मांग की।

आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों, कॉलोनियों में निजी स्कूलों के विस्तार और सड़क पर अनियंत्रित रैंप निर्माण को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गईं। लोगों ने कहा कि इससे जलनिकासी और यातायात दोनों पर असर पड़ रहा है।

बैठक में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, भूजल रिचार्ज और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम को प्रभावी बनाने की मांग भी उठी। रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे हरित पट्टी विकसित करने तथा अतिक्रमण हटाने के लिए एमडीडीए के नेतृत्व में संयुक्त कार्यबल बनाने का सुझाव भी दिया गया।

नागरिकों ने महायोजना-2041 का हिंदी संस्करण जारी करने की मांग रखी, ताकि आम लोग भूमि उपयोग, निर्माण नियमों और प्रस्तावित प्रावधानों को आसानी से समझ सकें। उनका कहना था कि शहर के भविष्य से जुड़ी योजना आम लोगों की भाषा में उपलब्ध होनी चाहिए।

फिलहाल मेट्रो सेवा, नए टाउनशिप, निर्माण नियंत्रण या हरित पट्टी से जुड़े ये सभी बिंदु सुझाव के रूप में दर्ज किए गए हैं। एमडीडीए की आगे की प्रक्रिया में इन आपत्तियों और सुझावों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद ही तय होगा कि किन प्रस्तावों को महायोजना के अंतिम स्वरूप में शामिल किया जा सकता है।

सेक्टरवार संवाद के अगले चरण में 10 जुलाई को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में सेक्टर-5 के नागरिकों, भू-स्वामियों और अन्य हितधारकों की बैठक निर्धारित है। वहां सामने आने वाले सुझावों को भी आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा

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