रानीबाग-भीमताल रोपवे को आगे बढ़ाने की मांग, 7.32 किमी परियोजना के साथ कैंचीधाम कनेक्टिविटी पर भी नजर

रानीबाग-भीमताल रोपवे अभी निर्माण चरण में नहीं है, बल्कि अध्ययन और मंजूरी प्रक्रिया में है। जानिए, 7.32 किमी प्रस्तावित परियोजना, कैंचीधाम कनेक्टिविटी और नैनीताल के व्यापक रोपवे नेटवर्क को लेकर अभी क्या स्थिति है और आगे कौन-कौन से चरण बाकी हैं।
Chief Minister Pushkar Singh Dhami and Bhawna Mehra with a representative ropeway installation highlighting the proposed Ranibagh-Bhimtal ropeway project in Uttarakhand.

देहरादून, 10 जुलाई। रानीबाग से भीमताल तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने की मांग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची है। हालांकि, परियोजना अभी निर्माण या अंतिम मंजूरी के चरण में नहीं है। नैनीताल जिले में प्रस्तावित रोपवे गलियारों की तकनीकी, आर्थिक और व्यावहारिक संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।

आवास सलाहकार परिषद की उपाध्यक्ष भावना मेहरा ने गुरुवार, 9 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर रानीबाग-भीमताल रोपवे परियोजना से संबंधित पत्र सौंपा। उन्होंने परियोजना पर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने और कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए वैकल्पिक यातायात व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया।

भावना मेहरा की ओर से सौंपे गए पत्र में रानीबाग से भीमताल तक प्रस्तावित रोपवे की लंबाई 7.32 किलोमीटर बताई गई है। इसके लिए रानीबाग में पांच हेक्टेयर और भीमताल में 5.536 हेक्टेयर भूमि चिह्नित किए जाने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, भूमि चिह्नित होने का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना को अंतिम स्वीकृति मिल गई है या निर्माण कार्य जल्द शुरू होने वाला है।

रानीबाग-भीमताल परियोजना को नैनीताल जिले में प्रस्तावित व्यापक रोपवे नेटवर्क से जोड़कर भी देखा जा रहा है। उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जिले के विभिन्न हिस्सों में रोपवे निर्माण की व्यवहार्यता का अध्ययन कराने के लिए तकनीकी सलाहकार नियुक्त किया है। इस प्रस्तावित नेटवर्क का उद्देश्य पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक आवागमन के वैकल्पिक साधन विकसित करना है।

तकनीकी सलाहकार संस्था सिस्ट्रा इंडिया के अनुसार, नैनीताल क्षेत्र में चार रोपवे लाइनों वाला नेटवर्क प्रस्तावित है। इस नेटवर्क में स्थानीय लोगों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यात्रा जरूरतों का अध्ययन किया जा रहा है। कैंचीधाम क्षेत्र तक बेहतर कनेक्टिविटी की संभावना भी इसी व्यापक अध्ययन का हिस्सा बताई गई है, लेकिन इसका अंतिम मार्ग अभी तय नहीं हुआ है।

तकनीकी और आर्थिक संभाव्यता का अध्ययन में संभावित मार्ग और स्टेशन तय करने के साथ इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक, यात्रियों की अनुमानित संख्या, परियोजना की लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और पहाड़ी भूभाग में सुरक्षा संबंधी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कौन से गलियारे तकनीकी और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाए जा सकते हैं।

रानीबाग-भीमताल की 7.32 किलोमीटर परियोजना और करीब 21 किलोमीटर के प्रस्तावित व्यापक रोपवे नेटवर्क को फिलहाल एक ही स्वीकृत परियोजना नहीं माना जा सकता। दोनों प्रस्ताव आपस में जुड़े हो सकते हैं, लेकिन उनका अंतिम प्रशासनिक स्वरूप, मार्ग और स्टेशन सरकारी मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगे।

परियोजना समर्थकों का कहना है कि रोपवे बनने से पर्यटन सीजन के दौरान रानीबाग, भीमताल, नैनीताल और कैंचीधाम की ओर जाने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यात्रियों को सड़क मार्ग के अलावा एक वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है।

स्थानीय कारोबार, होटल, होमस्टे और पर्यटन सेवाओं को भी परियोजना से लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक और यातायात संबंधी प्रभाव का आकलन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और व्यवहार्यता अध्ययन के बाद ही किया जा सकेगा।

फिलहाल रोपवे नेटवर्क की अंतिम दूरी, मार्ग, स्टेशन, निर्माण लागत और कार्य शुरू होने की तारीख घोषित नहीं की गई है। रानीबाग-भीमताल की लंबाई और भूमि से जुड़े आंकड़े मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में दिए गए हैं, जबकि व्यापक नेटवर्क का अंतिम स्वरूप तकनीकी अध्ययन और सरकारी स्वीकृतियों के बाद सामने आएगा।

ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को परियोजना का निर्माण शुरू होने के बजाय इसे अध्ययन से आगे की मंजूरी प्रक्रिया तक ले जाने की मांग के रूप में देखना अधिक सही होगा। व्यवहार्यता रिपोर्ट के बाद तकनीकी स्वीकृति, वित्तीय व्यवस्था, पर्यावरणीय अनुमति, भूमि और निविदा से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होने पर ही रोपवे के धरातल पर उतरने की स्थिति साफ होगी।

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