लोहाघाट, 24 जुलाई। चम्पावत जिले के लोहाघाट में बन रहे उत्तराखंड के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने छमनियां चौड़ में निर्माणाधीन कॉलेज का स्थलीय निरीक्षण कर काम की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
करीब 257 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस कॉलेज में महिला खिलाड़ियों के लिए पढ़ाई, प्रशिक्षण और आवास की सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जा रही हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था और संबंधित विभागों के अधिकारियों से अब तक पूरे हुए निर्माण कार्यों और शेष काम की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने छात्रावास ब्लॉक, टाइप-2 और टाइप-3 आवासीय भवनों, फुटबॉल मैदान, वॉलीबॉल मैदान और बहुउद्देश्यीय हॉल सहित परिसर में चल रहे अलग-अलग निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को तय समयसीमा के अनुसार काम की गति बनाए रखने और निर्माण के प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि भवनों और खेल सुविधाओं के निर्माण में गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। निर्माण सामग्री की नियमित जांच करने के साथ ही तकनीकी अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहकर कार्यों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए।
महिला स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर में फुटबॉल मैदान, एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल कोर्ट के साथ सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक विकसित किया जाना है। परियोजना में शैक्षणिक और प्रशासनिक भवन, स्टाफ आवास, सभागार, अतिथि गृह और बहुउद्देश्यीय हॉल भी शामिल हैं।
कॉलेज में करीब 300 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास बनाए जाने की योजना है। इससे राज्य के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाशाली छात्राओं को शिक्षा के साथ नियमित खेल प्रशिक्षण और रहने की सुविधा एक ही स्थान पर मिल सकेगी। कॉलेज का उद्देश्य महिला खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फरवरी 2026 में निर्माण स्थल का निरीक्षण कर परियोजना को निर्धारित समय पर पूरा करने और खेल सुविधाओं को बेहतर मानकों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए थे। जिला प्रशासन अब निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा कर रहा है।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि निर्माण के दौरान सामने आने वाली तकनीकी या प्रशासनिक समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए, ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने काम की प्रगति की नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
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