देहरादून में क्रिकेटर के पिता समेत 8 लोगों से 16.90 लाख का Cyber Fraud, जानिए ऐसे मामलों से कैसे बचें

Cyber Fraud के आठ मामलों में देहरादून के लोगों से करीब 16.90 लाख रुपये की ठगी हुई है। इनमें एक क्रिकेटर के पिता भी शामिल हैं, जिनके बैंक खाते से APK फाइल डाउनलोड करने के बाद 3.19 लाख रुपये निकाल लिए गए।
A hooded individual working at multiple computer screens, representing cyber fraud and online financial scams.

देहरादून, 5 अगस्त। देहरादून में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में आठ लोगों से करीब 16.90 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। पीड़ितों में क्रिकेटर अभिमन्यु ईश्वरन के पिता आरपी ईश्वरन भी शामिल हैं, जिन्हें डॉक्टर की ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के नाम पर भेजी गई APK फाइल के जरिए निशाना बनाया गया।

मालसी निवासी आरपी ईश्वरन ने पुलिस को बताया कि दो अगस्त को वह डॉक्टर की ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान एक अज्ञात नंबर से उनके व्हाट्सएप पर APK फाइल भेजी गई। उन्होंने इसे अपॉइंटमेंट प्रक्रिया का हिस्सा समझकर मोबाइल में डाउनलोड कर लिया।

पीड़ित के अनुसार, फाइल डाउनलोड करने के बाद उनके ICICI बैंक के बचत खाते से अलग-अलग समय पर तीन लेनदेन हुए। खाते से पहले 99,800 रुपये, फिर 92,451 रुपये और बाद में 1.27 लाख रुपये निकाले गए।

इस तरह उनके खाते से कुल 3,19,251 रुपये की ठगी हुई। रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और पुलिस को पूरे मामले की सूचना दी।

राजपुर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक लेनदेन, आरोपियों की ओर से इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और भेजी गई APK फाइल से जुड़ी तकनीकी जानकारी की जांच कर रही है।

आरपी ईश्वरन के अलावा देहरादून के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में सात अन्य लोगों से भी साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। अपराधियों ने फर्जी पहचान, परिचित बनकर संपर्क करने और खातों से अनधिकृत लेनदेन जैसे अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाया।

इन मामलों में अलग-अलग पीड़ितों से 1.25 लाख रुपये से लेकर 3.12 लाख रुपये तक की ठगी हुई। सभी आठ मामलों की रकम जोड़ने पर कुल नुकसान 16,90,251 रुपये, यानी करीब 16.90 लाख रुपये होता है।

APK फाइल से कैसे होता है Cyber Fraud?

APK एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। साइबर अपराधी ऐसी फाइल को अस्पताल की अपॉइंटमेंट, बैंक KYC, बिजली बिल, यातायात चालान, पार्सल या किसी सरकारी सेवा से जुड़ा ऐप बताकर भेजते हैं।

संदिग्ध ऐप इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल के मैसेज, नोटिफिकेशन, कॉन्टैक्ट और दूसरी जानकारियों तक पहुंचने की अनुमति मांग सकता है। उपयोगकर्ता बिना जांच किए अनुमति दे दे तो बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि आरपी ईश्वरन के खाते से रकम किस तकनीकी तरीके से निकाली गई, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

Cyber Fraud से कैसे बचें?

अनजान नंबर से भेजी गई APK फाइल, लिंक या अटैचमेंट डाउनलोड नहीं करना चाहिए। मोबाइल ऐप केवल आधिकारिक ऐप स्टोर या संबंधित संस्था की वेबसाइट से ही इंस्टॉल करें। ऐप डाउनलोड करते समय मांगी जा रही अनुमतियों की भी जांच करें।

OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। डॉक्टर की अपॉइंटमेंट, बैंकिंग सेवा, बिजली बिल या सरकारी सुविधा के लिए मैसेज में मिले लिंक के बजाय संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें।

ठगी होने के बाद तुरंत क्या करें?

बैंक खाते से संदिग्ध लेनदेन होते ही बैंक को सूचना देकर कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग सेवाएं ब्लॉक करानी चाहिए। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

संदिग्ध मोबाइल नंबर, लिंक, लेनदेन संख्या, बैंक संदेश और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या संबंधित थाने में भी लिखित शिकायत दें। साइबर ठगी के मामलों में जल्द शिकायत करने से रकम रोकने या संबंधित खाते को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।

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