क्या है प्रस्तावित टिहरी झील रिंग रोड परियोजना? जानिए इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को कैसे होगा फायदा

टिहरी झील के आसपास बेहतर सड़क संपर्क से 173 गांवों की करीब 84 हजार आबादी के लिए आवाजाही आसान हो सकती है, वहीं पर्यटकों को झील के ज्यादा हिस्सों तक पहुंच मिलने की संभावना है। लेकिन इस प्रस्तावित बदलाव में 12 बड़े पुलों की क्या भूमिका होगी और परियोजना अभी किस चरण में है
Tehri Lake and surrounding mountain landscape in Uttarakhand

नई टिहरी, 24 अगस्त। टिहरी झील आज उत्तराखंड के बड़े पर्यटन केंद्रों में गिनी जाती है, लेकिन इसके चारों ओर बसे गांवों और झील देखने आने वाले पर्यटकों के लिए लगातार और बेहतर सड़क संपर्क अब भी एक बड़ी जरूरत है। इसी समस्या को दूर करने के लिए टिहरी झील के चारों ओर करीब 170 किलोमीटर लंबी रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि झील के आसपास रहने वाले हजारों लोगों की आवाजाही को भी आसान बनाना है।

उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी दस्तावेज के मुताबिक, प्रस्तावित टिहरी लेक रिंग रोड लगभग 170 किलोमीटर लंबी होगी। इस सड़क पर कई छोटे-बड़े पुल बनने हैं और पूरी alignment में कुल 12 बड़े पुल प्रस्तावित किए गए हैं। पहले चरण में चार लंबे पुलों की Detailed Project Report यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

टिहरी रिंग रोड की जरूरत को समझने के लिए पुराने टिहरी की स्थिति को देखना जरूरी है। टिहरी बांध बनने से तैयार जलाशय के कारण पुराने टिहरी शहर के आसपास समुद्र तल से 830 मीटर तक की पुरानी मोटर सड़कें जलाशय में डूब गई थीं। परियोजना दस्तावेज में कहा गया है कि बांध से पूरी तरह प्रभावित गांवों को सरकार ने विस्थापित किया, लेकिन जलाशय के आसपास बसे कई गांवों के लोगों को आज भी पहले की तुलना में अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इसका असर स्थानीय लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है।

इसी समस्या के समाधान के रूप में टिहरी झील के चारों ओर दो लेन की रिंग रोड प्रस्तावित की गई है। विभाग के अनुसार, इस सड़क के बनने से टिहरी गढ़वाल जिले के 173 गांवों में रहने वाली करीब 84,000 की आबादी को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए झील के दूसरी ओर या आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने का रास्ता छोटा और सुविधाजनक हो सकता है।

रिंग रोड पर कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए बड़े पुल परियोजना का अहम हिस्सा होंगे। दस्तावेज के अनुसार, पूरी सड़क पर 12 प्रमुख पुल प्रस्तावित हैं। इनमें से पहले चरण में चार पुलों की DPR तैयार की जानी है। पिपलडाली में लगभग 450 मीटर लंबा नया तीन लेन पुल प्रस्तावित है, जबकि वहां मौजूद पुराने पुल को भी बनाए रखने की योजना है।

इसी तरह डोबरा-चांठी में मौजूदा पुल को बनाए रखते हुए लगभग 500 मीटर लंबा नया दो लेन पुल बनाने का प्रस्ताव है। हडकीखाला में करीब 150 मीटर और कोटी में लगभग 370 मीटर लंबे नए तीन लेन पुल प्रस्तावित किए गए हैं। इन बड़े पुलों के लिए cable-stayed, suspension या arch जैसे long-span designs पर विचार किया जा सकता है। अंतिम डिजाइन DPR और तकनीकी अध्ययन के आधार पर तय होगा।

परियोजना का दूसरा बड़ा उद्देश्य टिहरी झील के आसपास पर्यटन सुविधाओं को विकसित करना है। दस्तावेज में टिहरी जलाशय का क्षेत्रफल करीब 42 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। यहां सालभर देश और विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन झील के चारों ओर अच्छी गुणवत्ता की लगातार सड़क न होने से पर्यटक पूरे जलाशय क्षेत्र को आसानी से नहीं देख पाते और पर्यटन से जुड़ा आधारभूत ढांचा भी अपेक्षित स्तर पर विकसित नहीं हो पाया है।

रिंग रोड बनने से पर्यटकों के लिए झील के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच आसान हो सकती है। सड़क संपर्क बेहतर होने पर झील के आसपास पर्यटन सुविधाओं, स्थानीय बाजारों और adventure water activities से जुड़े ढांचे के विकास की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। परियोजना दस्तावेज में राज्य सरकार के टिहरी जलाशय को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

टिहरी झील की देहरादून से दूरी करीब 115 किलोमीटर बताई गई है। ऐसे में सरकार इसे घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए आसानी से पहुंचने वाला पर्यटन स्थल बनाना चाहती है। रिंग रोड के जरिए पर्यटक केवल झील के किसी एक हिस्से तक सीमित रहने के बजाय उसके आसपास के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगे।

इस परियोजना का महत्व केवल स्थानीय यातायात और पर्यटन तक सीमित नहीं है। PWD के दस्तावेज में प्रस्तावित रिंग रोड को चारधाम यात्रा के लिए मुख्य या वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावना भी बताई गई है। अगर पूरी परियोजना योजना के मुताबिक विकसित होती है, तो इसका इस्तेमाल स्थानीय यातायात के साथ यात्रा सीजन में वैकल्पिक कनेक्टिविटी के रूप में भी किया जा सकेगा।

परियोजना अभी निर्माण के चरण में नहीं है। प्रस्तावित रिंग रोड की feasibility study और preliminary survey हो चुके हैं, जबकि अब बड़े पुलों के लिए विस्तृत डिजाइन और DPR तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पहले चरण के चार पुलों की DPR तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की अनुभवी consulting firms से Expression of Interest मांगा गया है।

DPR में केवल पुल का नक्शा तैयार नहीं किया जाएगा। इसके तहत topographical survey, hydrological study, geotechnical investigation, environmental और social impact assessment, seismic और wind load analysis, construction method, लागत, risk analysis और EPC implementation plan तक तैयार किया जाना है। चुने गए consultant को यह काम assignment शुरू होने के चार महीने के भीतर पूरा करना होगा।

दस्तावेज में चार पुलों की DPR consultancy की अनुमानित लागत 10 से 12 करोड़ रुपये बताई गई है। यह रकम पूरी टिहरी रिंग रोड या चारों पुलों के निर्माण की लागत नहीं है, बल्कि केवल पहले चरण के चार पुलों की DPR और consultancy से जुड़े काम की अनुमानित लागत है। पूरी 170 किलोमीटर रिंग रोड की निर्माण लागत इस दस्तावेज में नहीं दी गई है।

अगर परियोजना आगे बढ़ती है तो इसका सबसे बड़ा असर टिहरी झील के किनारे बसे गांवों की रोजमर्रा की कनेक्टिविटी और पर्यटन पर दिखाई दे सकता है। एक तरफ स्थानीय लोगों को लंबी दूरी तय करने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर पर्यटकों के लिए टिहरी झील के ज्यादा हिस्सों तक पहुंच आसान हो सकती है। फिलहाल परियोजना की विस्तृत लागत, निर्माण शुरू होने और पूरा होने की तारीख जैसे महत्वपूर्ण बिंदु DPR और आगे की सरकारी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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