देहरादून, 21 अगस्त। उत्तराखंड में नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी अब डिजिटल माध्यम से और बेहतर तरीके से की जाएगी। नशे की लत से जूझ रहे मरीजों के पंजीकरण से लेकर इलाज और फॉलोअप तक की जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज की जाएगी, जिससे केंद्रों में चल रहे उपचार और पुनर्वास की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा।
यह व्यवस्था केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ी है। मंत्रालय ने NAPDDR के तहत Nasha Mukt Bharat Abhiyaan Management Information System यानी NMBA MIS विकसित किया है, जिसके जरिए नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड की डिजिटल निगरानी की जाती है।
NMBA MIS में मरीज के पंजीकरण, मेडिकल जांच, नशे के सेवन से जुड़ी जानकारी, बीमारी की पहचान और इलाज का रिकॉर्ड दर्ज किया जा सकता है। मरीज को दी जा रही दवाओं, काउंसिलिंग और दूसरी मनो-सामाजिक सेवाओं की जानकारी भी इसमें शामिल होती है।
इलाज पूरा होने के बाद मरीज का फॉलोअप भी डिजिटल रिकॉर्ड में रखा जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उपचार के बाद मरीज की स्थिति कैसी है और पुनर्वास की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है।
इस डिजिटल व्यवस्था के साथ Nasha Mukt Bharat Abhiyaan का NMBA 2.0 App भी उपलब्ध है। इस ऐप के जरिए आम लोग अपने नजदीकी नशा मुक्ति केंद्र की जानकारी खोज सकते हैं। इसमें नशा मुक्ति से जुड़ी हेल्पलाइन, जागरूकता सामग्री और फीडबैक जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
हालांकि NMBA 2.0 App और NMBA MIS को एक ही प्लेटफॉर्म नहीं माना जाना चाहिए। NMBA 2.0 App मुख्य रूप से आम लोगों को अभियान और उपलब्ध सेवाओं से जोड़ता है, जबकि NMBA MIS का इस्तेमाल मरीजों के इलाज, पुनर्वास और नशा मुक्ति केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी के लिए किया जाता है।
नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी केवल डिजिटल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। NAPDDR के तहत सहायता प्राप्त केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण भी किया जाता है। इसमें केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, बेड क्षमता, कर्मचारियों, चिकित्सा और काउंसिलिंग सेवाओं, साफ-सफाई और रिकॉर्ड की जांच की जाती है।
निरीक्षण में तय मानकों का पालन नहीं मिलने पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। केंद्रों को मिलने वाली सहायता और उनके संचालन को जारी रखने में निरीक्षण रिपोर्ट की भूमिका रहती है।
उत्तराखंड में नशा मुक्ति केंद्र पहले से पंजीकरण और निगरानी के दायरे में हैं। डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था से मरीजों के उपचार की जानकारी व्यवस्थित रखने के साथ केंद्रों के कामकाज पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।
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