देहरादून, 12 अक्टूबर। उत्तराखंड में सड़क खोदने के बाद लंबे समय तक उसे अधूरा छोड़ने की समस्या पर रोक लगाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नई रोड कटिंग पॉलिसी तैयार की है। प्रस्ताव के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में सड़क खुदाई की अनुमति साल में केवल जनवरी और दिसंबर में दी जाएगी। विशेष स्थिति में दूसरे महीनों में खुदाई के लिए जिलाधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
नई नीति अभी लागू नहीं हुई है। लोक निर्माण विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे राज्य सरकार और कैबिनेट की मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी।
प्रस्तावित नीति के अनुसार पेयजल, सीवर, बिजली, गैस, ऑप्टिकल फाइबर और अन्य यूटिलिटी कार्यों के लिए सड़क काटने वाली एजेंसियों को तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करना होगा। पांच किलोमीटर से अधिक लंबाई में सड़क कटान के लिए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता की अनुमति लेना जरूरी होगा।
सड़क खोदने वाली एजेंसी को काम पूरा होने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल करना होगा। इसके साथ ही बहाल की गई सड़क का दो साल तक रखरखाव भी संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।
लोक निर्माण विभाग संबंधित एजेंसी से लिखित आश्वासन और बैंक गारंटी भी लेगा। दो साल की अवधि में सड़क की गुणवत्ता खराब मिलने पर मरम्मत का खर्च बैंक गारंटी से वसूला जा सकेगा।
अलग-अलग कामों के लिए समय सीमा भी तय करने का प्रस्ताव है। 100 मीटर सीवर लाइन बिछाने के लिए गहराई के अनुसार 10 से 20 दिन और 100 मीटर पेयजल लाइन के लिए पाइप के आकार के अनुसार 8 से 25 दिन का समय दिया जाएगा।
बिजली नेटवर्क के काम में एक किलोमीटर पाइप बिछाने के लिए सात दिन और केबल बिछाने के लिए आठ दिन का समय प्रस्तावित है। वहीं 100 मीटर गैस पाइपलाइन के लिए 9 से 10 दिन की समय सीमा रखी गई है।
जिन सड़कों पर पहले से Multi Utility Duct (MUD) मौजूद होगा, वहां अलग-अलग यूटिलिटी लाइन बिछाने के लिए दोबारा सड़क काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विशेष परिस्थिति में इसके लिए Multi-Sectoral Coordination Committee की अनुमति लेनी होगी।
नई नीति का उद्देश्य बार-बार सड़क खोदने, काम अधूरा छोड़ने और मरम्मत के बाद सड़क की खराब गुणवत्ता जैसी समस्याओं पर नियंत्रण लगाना है। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों को सड़क कटान और बहाली के लिए तय नियमों का पालन करना होगा।
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