RTI में लंबी जानकारी मांगी तो देना पड़ सकता है अतिरिक्त शुल्क, राज्य सूचना आयोग का अहम फैसला

क्या RTI में सिर्फ ₹10 शुल्क देकर हर जानकारी मिल जाती है? उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग के हालिया फैसले ने साफ किया है कि लंबी जानकारी मांगने पर अतिरिक्त शुल्क क्यों देना पड़ सकता है और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड का निरीक्षण भी विकल्प बनता है।
RTI में लंबी जानकारी मांगने पर अतिरिक्त शुल्क और दस्तावेजों की प्रतिलिपि प्रक्रिया को दर्शाती दृश्य संरचना

सूचना का अधिकार (RTI) आम नागरिकों को सरकारी जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है। RTI आवेदन दाखिल करने के लिए सामान्यतः केवल ₹10 का आवेदन शुल्क देना होता है, लेकिन यदि मांगी गई जानकारी बहुत अधिक पृष्ठों में हो तो आवेदक को उसकी प्रतिलिपि लागत अलग से चुकानी पड़ सकती है।

उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि सूचना उपलब्ध कराने के लिए दस्तावेजों की प्रतिलिपि तैयार करने का शुल्क नियमों के तहत लिया जा सकता है।

राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी (PIO) केवल अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध जानकारी देने के लिए बाध्य है। उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह विभिन्न कार्यालयों से जानकारी एकत्र कर आवेदक को उपलब्ध कराए।

क्या था मामला?

RTI आवेदक मुकेश कुमार ने उत्तराखंड सिंचाई विभाग के एक टेंडर, उससे जुड़े कार्यों और निरीक्षण संबंधी विस्तृत जानकारी मांगी थी।

सूचना अधिकारी ने बताया कि मांगी गई जानकारी कुल 2926 पृष्ठों में उपलब्ध है। इसके लिए दस्तावेजों की प्रतिलिपि तैयार करने की लागत के रूप में आवेदक से ₹5851 जमा करने को कहा गया।

आवेदक ने इस शुल्क का विरोध करते हुए पहले प्रथम अपील और बाद में द्वितीय अपील दायर की।

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मामले की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने आवेदक को 50 पृष्ठों तक की जानकारी निशुल्क उपलब्ध कराने की अनुशंसा की। इसके बाद यदि आवेदक अतिरिक्त दस्तावेज प्राप्त करना चाहता है, तो उसे निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदक चाहे तो संबंधित कार्यालय जाकर मूल अभिलेखों का निरीक्षण कर सकता है। RTI कानून के तहत रिकॉर्ड देखने का अधिकार भी आवेदक को प्राप्त है।

RTI में कब देना पड़ता है अतिरिक्त शुल्क?

RTI अधिनियम और संबंधित नियमों के अनुसार आवेदन शुल्क के अलावा दस्तावेजों की प्रतिलिपि के लिए अलग शुल्क लिया जा सकता है। सामान्यतः प्रति पृष्ठ निर्धारित दर के अनुसार शुल्क लिया जाता है। इसलिए यदि मांगी गई सूचना सैकड़ों या हजारों पन्नों में हो, तो उसकी प्रतिलिपि लागत आवेदक को वहन करनी पड़ सकती है।

राज्य सूचना आयोग के इस फैसले को RTI प्रक्रिया और सूचना उपलब्ध कराने के नियमों को स्पष्ट करने वाले महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

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