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उत्तराखंड में रोपवे परियोजना की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और अधिकारी।

उत्तराखंड में रोपवे संचालन के नए नियम, केदारनाथ-हेमकुंड साहिब परियोजनाओं में तैनात होंगे नोडल अधिकारी

उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं को लेकर अब निर्माण के साथ उनके संचालन और निगरानी की व्यवस्था को भी स्पष्ट करने पर जोर है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर लिए गए फैसले इन परियोजनाओं के आगे के काम के लिए अहम होंगे।

Hospital ward in Dehradun with patients receiving treatment for H1N1 and healthcare staff attending to them.

देहरादून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, एक दिन में 49 नए मरीज; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

देहरादून में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण की मौजूदा स्थिति, अस्पतालों पर इसका असर और इससे निपटने के लिए की जा रही तैयारियों को लेकर क्या सामने आया है, पूरी जानकारी आगे पढ़ें।

Electrical distribution lines, utility poles and power equipment along a road in Uttarakhand.

उत्तराखंड में बिजली लाइन या उपकरण तोड़ना पड़ेगा महंगा, ₹1 लाख तक जुर्माना; नियमों में हुए ये बड़े बदलाव

बिजली से जुड़े अलग-अलग उल्लंघनों के लिए अब कार्रवाई और आर्थिक दंड के प्रावधान अलग-अलग होंगे। विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचाने से लेकर नियामक आयोग के आदेशों की अनदेखी तक, संशोधित धाराओं में जुर्माने की सीमा बदली गई है और कुछ मामलों में कंपाउंडिंग का दायरा भी बढ़ाया गया है।

Traffic enforcement officer inspecting a commercial vehicle during a pressure horn check in Uttarakhand

उत्तराखंड में प्रेशर हॉर्न बजाना अब पड़ेगा महंगा, पहली बार चेतावनी; दोबारा गलती पर ₹10 हजार तक जुर्माना

स्कूल, अस्पताल और साइलेंस जोन जैसे संवेदनशील इलाकों में नियम और सख्त हैं। किस स्थिति में कितना दंड लगेगा और किन हॉर्न पर कार्रवाई होगी, आगे जानिए।

Protesters being taken away in a police vehicle during the Uttarakhand statehood movement in Mussoorie

2 सितंबर 1994: मसूरी की सड़कों पर चली थीं गोलियां, 6 आंदोलनकारियों ने राज्य आंदोलन में दिया था बलिदान

खटीमा में हुई पुलिस फायरिंग के अगले ही दिन सामने आई इस घटना ने पहाड़ों में चल रहे आंदोलन को नया मोड़ दिया। इसके बाद अलग राज्य की मांग को लेकर आक्रोश और समर्थन दोनों व्यापक हुए, लेकिन तीन दशक से अधिक समय बाद भी उस दौर से जुड़े कुछ सवाल और मांगें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। शहीदों की स्मृति से लेकर मूल निवास, भू-कानून और गैरसैंण जैसे मुद्दों तक, आज की बहस में 1994 के आंदोलन की विरासत किस तरह मौजूद है, यही इस घटना को केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं रहने देता।

Rescue personnel clearing debris from a damaged house after a landslide in Almora

Almora Landslide: वड्यूड़ा गांव में मकान पर गिरा मलबा, मां और दो बच्चों की मौत

मौके पर स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाने और दबे लोगों की तलाश शुरू हुई। सड़क बंद होने से पैदा हुई चुनौती के बीच रेस्क्यू टीम किस तरह घटनास्थल तक पहुंची और अभियान में क्या सामने आया, यह इस हादसे की दूसरी अहम कड़ी है।

SUV caught in fast-moving floodwater and SDRF personnel conducting a night rescue operation in Dehradun

देहरादून के प्रेमनगर में तेज बहाव में बही क्रेटा कार, 2 किमी दूर घायल मिली युवती; दो की मौत

रात के अंधेरे और खराब मौसम के बीच चलाए गए अभियान में घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर घायल युवती तक टीम पहुंची, जबकि बाकी दो सवारों की तलाश कई घंटे जारी रही। हादसा ऐसे समय हुआ जब बारिश के बीच राज्य की रेस्क्यू टीमें पहले से अलर्ट पर थीं। घटना यह भी दिखाती है कि तेज बारिश के दौरान अचानक बढ़े पानी के बहाव वाले मार्गों पर रात में आवाजाही कितनी जोखिमपूर्ण हो सकती है और ऐसे मामलों में त्वरित रेस्क्यू तैयारी कितनी निर्णायक होती है।

Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission UKSSSC headquarters building in Dehradun

UKSSSC Recruitment: उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अपडेट, UKSSSC ने समूह ‘ग’ के 553 पदों पर भर्ती निकाली; जानें आवेदन की तारीख

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस भर्ती में सबसे अहम बात सिर्फ पदों की संख्या नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों में उपलब्ध अवसरों और आवेदन से पहले पूरी की जाने वाली औपचारिकताओं को समझना है। पदों के अनुसार वेतनमान और चयन प्रक्रिया भी अलग-अलग विवरण के साथ दी गई है, जबकि परीक्षा की संभावित तारीख भी तय की गई है। किन पदों के लिए कौन-सी अतिरिक्त शर्तें लागू हैं और आवेदन करते समय किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी, यह हिस्सा अभ्यर्थियों के लिए खासा महत्वपूर्ण हो सकता है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत निर्मित रेलवे सुरंग का आंतरिक दृश्य

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट: देश की सबसे लंबी रेल सुरंग 90% से ज्यादा बनकर तैयार, जनवरी से बिछेगा ट्रैक

गढ़वाल के लिए यह परियोजना सिर्फ एक नई परिवहन लाइन नहीं होगी, बल्कि सड़क पर निर्भरता के बीच एक अतिरिक्त रेल विकल्प तैयार करेगी। ऋषिकेश से आगे देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग तक पहुंच का यह बदलाव स्थानीय यात्रियों के साथ चारधाम से जुड़े क्षेत्रों के लिए भी मायने रखेगा। पूरी परियोजना में सुरंगों की हिस्सेदारी कितनी है और T-8 के बाद अगला बड़ा चरण क्या होगा, इसकी तस्वीर भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

Drone and sensor equipment monitoring a glacial lake in the high Himalayas of Uttarakhand

उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी हाईटेक, अब ड्रोन-सैटेलाइट और सेंसर से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

किसी झील में असामान्य बदलाव समय रहते पकड़ना प्रशासन के लिए संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्रवाई की गुंजाइश बढ़ा सकता है। इसके लिए तकनीकी एजेंसियों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी तंत्र और पहले से चल रहे पायलट प्रयास अहम होंगे। लेकिन यह निगरानी व्यवस्था जमीन पर चेतावनी और प्रतिक्रिया तक कितनी तेजी से पहुंचेगी, यही इसकी असली परीक्षा होगी।