श्रीनगर गढ़वाल, 31 अगस्त। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत देवप्रयाग से जनासू के बीच बन रही T-8 रेल सुरंग का 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। 14.58 किलोमीटर लंबी इस सुरंग की खुदाई पूरी होने के बाद अब लाइनिंग, फिनिशिंग, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़े आंतरिक कार्य किए जा रहे हैं। निर्माणदायी संस्था ने दिसंबर 2026 तक शेष काम पूरा कर सुरंग RVNL को सौंपने का लक्ष्य रखा है।
सुरंग का काम पूरा होने के बाद जनवरी 2027 से इसके भीतर रेल ट्रैक बिछाने की तैयारी है। T-8 सुरंग को दो समानांतर रेल टनल के रूप में विकसित किया गया है, जिससे भविष्य में अप और डाउन लाइन के लिए अलग-अलग ट्रैक का उपयोग किया जा सकेगा।
“ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत देश की सबसे लंबी रेल सुरंग देवप्रयाग-जनासू का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सुरंग के आंतरिक कार्य किए जा रहे हैं। निर्माणदायी कंपनी ने दिसंबर तक कार्य पूरा कर आरवीएनएल को हैंडओवर करने का लक्ष्य रखा है। अगले वर्ष जनवरी से सुरंग के अंदर रेल पटरी बिछाने का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।”
— हिमांशु बड़ोनी, मुख्य परियोजना प्रबंधक, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना, RVNL
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की कुल लंबाई करीब 125 किलोमीटर है। इसका लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। परियोजना में 16 मुख्य रेल सुरंगें और 19 प्रमुख पुल बनाए जा रहे हैं। हालांकि देवप्रयाग-जनासू सुरंग अंतिम चरण में है, जबकि पूरी रेल परियोजना का काम अभी जारी है।
देवप्रयाग-जनासू T-8 सुरंग के निर्माण में सिंगल शील्ड टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया। इस मशीन को ‘शक्ति’ नाम दिया गया था। करीब 9.11 मीटर व्यास वाली इस TBM से लगभग 10.4 किलोमीटर हिस्से की खुदाई की गई, जबकि बाकी हिस्से को NATM तकनीक से तैयार किया गया।
TBM शक्ति ने औसतन करीब 413 मीटर प्रति माह की गति से काम किया। 16 अप्रैल 2025 को सुरंग की एक ट्यूब का ब्रेकथ्रू हुआ था, जबकि दूसरी समानांतर ट्यूब की खुदाई बाद में पूरी की गई। इसके बाद से सुरंग के भीतर फिनिशिंग और दूसरे तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं।
रेलवे सुरंग निर्माण में इस परियोजना को तकनीकी रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबी दूरी तक TBM के इस्तेमाल और कठिन हिमालयी भूगर्भीय परिस्थितियों में सुरंग निर्माण के कारण T-8 परियोजना के प्रमुख हिस्सों में शामिल है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पूरी होने के बाद ऋषिकेश से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग तक रेल संपर्क स्थापित होगा। इससे गढ़वाल क्षेत्र के लोगों को सड़क मार्ग के अलावा रेल परिवहन का विकल्प मिलेगा और चारधाम यात्रा से जुड़े क्षेत्रों तक पहुंच भी आसान हो सकती है।
पूरे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट का काम अभी जारी है। अगस्त 2026 में RVNL की ओर से परियोजना की कुल प्रगति करीब 78 प्रतिशत बताई गई थी और इसके पूरा होने का लक्ष्य दिसंबर 2029 रखा गया है। इसलिए देवप्रयाग-जनासू सुरंग की प्रगति को पूरे रेल प्रोजेक्ट की प्रगति से अलग देखा जाना जरूरी है।
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