चमोली, 30 अगस्त। चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में स्थित ड्याली सेरा को वर्ष 2026 के लिए ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ चुना गया है। पर्यटन विभाग की इस पहल के तहत अब क्षेत्र को नए ट्रेकिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने और स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने की तैयारी है।
ड्याली सेरा में 1 सितंबर 2026 से 30 मार्च 2027 तक विशेष ट्रेकिंग अभियान चलाया जाएगा। जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ के अनुसार, अभियान उत्तराखंड पर्यटन से पंजीकृत स्थानीय टूर ऑपरेटरों और एजेंसियों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। उत्तराखंड के साथ दूसरे राज्यों से आने वाले ट्रेकर्स भी इसमें शामिल हो सकेंगे।
अभियान के तहत पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर शुरुआती 300 ट्रेकर्स के लिए प्रति व्यक्ति 2,000 रुपये की सब्सिडी तय की गई है। यह सहायता सीधे ट्रेकर को देने के बजाय अभियान संचालित करने वाली संबद्ध टूर ऑपरेटर एजेंसी को पर्यटन विभाग की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी।
स्थानीय पर्यटन रिपोर्टों के अनुसार, ड्याली बुग्याल समुद्र तल से करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। क्षेत्र में हिमालयी बुग्याल, जंगल और घाटियों का प्राकृतिक दृश्य मिलता है, जिसके कारण इसे साहसिक पर्यटन के लिए नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
पर्यटन कारोबारियों का सुझाव है कि ड्याली बुग्याल को डुब्रा वैली, कुआरी पास, गोरसों बुग्याल और औली से जोड़कर एक नया ट्रेकिंग सर्किट विकसित किया जा सकता है। स्थानीय रिपोर्टों में इस संभावित सर्किट को करीब छह दिन में पूरा किए जाने की बात कही गई है। हालांकि यह अभी विभाग की आधिकारिक घोषित ट्रेक itinerary नहीं है।
ड्याली सेरा को ट्रेक ऑफ द ईयर चुने जाने से आसपास के गांवों में होमस्टे, स्थानीय गाइड, पोर्टर और दूसरे पर्यटन व्यवसायों से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर बनने की उम्मीद है। ट्रेकिंग गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार को भी फायदा मिल सकता है।
पर्यटन कारोबारियों ने रूट पर कैंप साइट, पेयजल और रास्तों के रखरखाव जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि इन सुविधाओं पर काम किया जाता है तो ड्याली सेरा को लंबे समय तक व्यवस्थित ट्रेकिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
स्थानीय पर्यटन कारोबारियों का यह भी मानना है कि ड्याली सेरा जैसे नए रूट सामने आने से कुआरी पास जैसे लोकप्रिय ट्रेक पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है। इससे ट्रेकर्स को नए विकल्प मिलने के साथ साहसिक पर्यटन जिले के दूसरे क्षेत्रों तक भी फैल सकता है।
इससे पहले 2025 में चमोली की चिनाप वैली भी ‘ट्रेक ऑफ द ईयर’ कार्यक्रम का हिस्सा रही थी। उस वर्ष उत्तरकाशी के गुलाबी कांठा और पिथौरागढ़ के बनकटिया ग्लेशियर को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया था। अब 2026 में ड्याली सेरा को चुने जाने से जोशीमठ क्षेत्र के एक और ट्रेकिंग रूट को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
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