देहरादून, 11 जुलाई 2026। उत्तराखंड के यात्रा क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे की वापसी के लिए लागू डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम के उपलब्ध चार वर्षीय आंकड़ों में केदारनाथ धाम सबसे आगे रहा है। केदारनाथ, गंगोत्री और बदरीनाथ से कुल 58,175 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया, जिसमें अकेले केदारनाथ की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत रही।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, केदारनाथ, गंगोत्री और बदरीनाथ से कुल 58,175 किलोग्राम प्लास्टिक एकत्र हुआ। इसमें केदारनाथ से 49,532 किलोग्राम और गंगोत्री से 4,300 किलोग्राम प्लास्टिक संग्रहित किया गया, जबकि शेष संग्रह बदरीनाथ क्षेत्र से हुआ।
डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम की शुरुआत मई 2022 में केदारनाथ क्षेत्र में की गई थी। बाद में इसे बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्लास्टिक उत्पादों को उपयोग के बाद खुले में फेंके जाने से रोकना और उन्हें संग्रह तथा रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया तक वापस पहुंचाना है।
इस प्रणाली के तहत प्लास्टिक की बोतलों और मल्टीलेयर पैकेजिंग पर विशेष क्यूआर कोड लगाया जाता है। उत्पाद खरीदते समय उपभोक्ता से 10 रुपये की वापसी योग्य राशि ली जाती है। इस्तेमाल के बाद बोतल या पैकेजिंग को निर्धारित संग्रह केंद्र पर लौटाने पर यह राशि डिजिटल माध्यम से वापस की जाती है।
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केदारनाथ यात्रा क्षेत्र में गौरीकुंड और मंदिर के पास रिवर्स वेंडिंग मशीनों की व्यवस्था भी की गई है। संग्रह केंद्रों और मशीनों के जरिये जमा किया गया प्लास्टिक मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तक पहुंचाया जाता है, जहां उसकी छंटाई, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
केदारनाथ तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गौरीकुंड से लंबा पैदल मार्ग तय करना पड़ता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहां से सबसे अधिक प्लास्टिक वापसी दर्ज होना संग्रह व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन, सफाई कर्मचारियों, दुकानदारों और यात्रियों की भागीदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से जारी व्यापक जानकारी के अनुसार, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड व्यवस्था के तहत विभिन्न यात्रा क्षेत्रों में 20 लाख से अधिक प्लास्टिक बोतलों को रीसाइकिल किया गया है। इसके साथ ही 66 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन रोकने और 110 से अधिक रोजगार के अवसर तैयार होने का भी दावा किया गया है। हालांकि ये आंकड़े पूरे कार्यक्रम से जुड़े हैं और इन्हें केवल तीन धामों के 58,175 किलोग्राम प्लास्टिक संग्रह का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।
चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पानी की बोतलों, पेय पदार्थों और पैकेटबंद खाद्य सामग्री से प्लास्टिक कचरा बढ़ता है। ऐसे में डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम हिमालयी पर्यावरण, नदियों और यात्रा मार्गों को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यवस्था बनकर सामने आया है।
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