बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, उत्तराखंड से भी रहा खास जुड़ाव; 71 की उम्र में पहुंचे थे केदारनाथ

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका उत्तराखंड से पुराना रिश्ता फिर याद किया जा रहा है, जिसमें केदारनाथ यात्रा, नीती घाटी की शूटिंग और यहां बसने की इच्छा शामिल है।
Portrait of Nana Patekar with his name and the years 1951–2026 displayed alongside the image.

देहरादून, 8 अक्टूबर। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने निधन की पुष्टि की। शुरुआती रिपोर्टों में कार्डियक अरेस्ट को मौत की वजह बताया गया है।

नाना पाटेकर का उत्तराखंड से भी खास जुड़ाव रहा। वर्ष 2022 में वह एक मराठी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में उत्तराखंड आए थे। इस दौरान उन्होंने चमोली, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ और देहरादून समेत कई जगहों पर समय बिताया।

सितंबर 2022 में 71 वर्ष की उम्र में नाना पाटेकर केदारनाथ पहुंचे थे। वह बाबा केदार के दर्शन करने के साथ भैरवनाथ तक भी गए थे। उस समय वह उत्तराखंड में अपनी मराठी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे।

चमोली जिले की नीती घाटी में भी उनकी फिल्म की शूटिंग हुई थी। वह करीब नौ दिनों तक इस क्षेत्र में रहे। इसी दौरान उन्होंने जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में समय बिताया और उत्तराखंड में जमीन लेकर घर बनाने तथा भविष्य में यहां रहने की इच्छा जताई थी।

उत्तराखंड प्रवास के दौरान नाना पाटेकर ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में मुलाकात भी की थी। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए बेहतर स्थान बताया था और यहां के लोगों तथा प्राकृतिक वातावरण की सराहना की थी।

नाना पाटेकर ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने गंगा आरती में हिस्सा लिया। उत्तराखंड प्रवास के दौरान उन्होंने धार्मिक स्थलों के साथ सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों का भी दौरा किया।

देहरादून में भी उनकी फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग हुई थी। आरोग्यधाम अस्पताल में फिल्म के दृश्य फिल्माए गए थे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय खानपान भी पसंद किया था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें मंडुवे की रोटी और राई-पालक की सब्जी पसंद आई थी।

नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग अभिनय शैली, गंभीर किरदारों और संवाद अदायगी के लिए जाने जाते थे। परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर, तिरंगा और वेलकम जैसी फिल्मों में उनके किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया।

उनके निधन के बाद उत्तराखंड से जुड़ी उनकी पुरानी यात्राएं और यहां बिताया समय भी एक बार फिर चर्चा में है। केदारनाथ दर्शन, नीती घाटी में शूटिंग, ऋषिकेश की गंगा आरती और उत्तराखंड में घर बनाने की इच्छा उनके राज्य से जुड़ाव की प्रमुख यादों में शामिल हैं।

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