उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस छोड़ने की खबरों का किया खंडन, दो पदों से हटने की कही बात; जानिए पूरा मामला

ED की कार्रवाई के बाद सामने आए इस पूरे घटनाक्रम में भर्ती परीक्षा से जुड़े पुराने मामले और रावत की नैतिक जिम्मेदारी का मुद्दा भी जुड़ गया है। जांच में क्या आरोप हैं और रावत ने अपने कार्यकाल को लेकर क्या कहा, आगे जानें।
Senior Indian political leader speaking to media with a microphone

देहरादून, 12 सितंबर। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी की दो संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने की इच्छा जताई है। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी की सदस्यता और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य का पद छोड़ने की पेशकश की है। हालांकि उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी है।

रावत का यह बयान उनके पूर्व विशेष कार्याधिकारी और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद सामने आया है। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस के अभियान पर कोई सवाल उठे।

हरीश रावत ने बाद में मीडिया में चल रही उन खबरों का भी खंडन किया, जिनमें उनके कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में है… वह तो मेरे साथ ही स्वर्ग में भी जाएगी।” रावत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता छोड़ने की बात नहीं कही है, बल्कि ED की कार्रवाई के बाद यदि कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर असर पड़ता है तो वह प्रदेश कार्यकारिणी और AICC की वर्किंग कमेटी में अपने पदों से त्यागपत्र देना चाहेंगे। उन्होंने मीडिया से अपने पूरे पोस्ट को पढ़कर खबरों में सुधार करने का आग्रह भी किया।

ED की कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में की गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की OMR शीटों को सुरक्षित कस्टडी से बाहर ले जाकर उनमें कथित रूप से बदलाव किया गया था। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

ED के अनुसार, चंदन सिंह जीना के परिसर से 32 लाख रुपये नकद, करीब 200.5 ग्राम सोने के सिक्के और चेन तथा 12 महंगी घड़ियां बरामद की गईं। इसके अलावा जीना और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों में 52.16 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं। एजेंसी ने जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये बताया है।

चंदन सिंह जीना हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके विशेष कार्याधिकारी रहे थे और वर्तमान में उनके निजी सहायक के रूप में काम कर रहे हैं। रावत ने कहा कि जीना लंबे समय तक उनके साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर काम कर चुके हैं और फिलहाल उन्हें उन पर लगाए गए आरोपों पर विश्वास नहीं है।

हालांकि रावत ने यह भी कहा कि यदि जांच में OMR शीटों में छेड़छाड़ या किसी तरह की गड़बड़ी के प्रमाण सामने आते हैं तो यह गंभीर मामला होगा। उन्होंने कहा कि यदि उनके कार्यकाल में हुई किसी भर्ती या फैसले से युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा है तो वह इसके लिए राज्य के लोगों से क्षमा मांगते हैं।

हरीश रावत वर्ष 2014 से 2017 के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे थे और 2016 की यह भर्ती प्रक्रिया भी उनके कार्यकाल के दौरान हुई थी। इसी वजह से उन्होंने मामले को लेकर नैतिक जिम्मेदारी की बात कही है। हालांकि उन्होंने साफ किया है कि जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित होने पर ही जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई भर्तियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस दौरान 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास भर्ती मामलों में उनकी संलिप्तता से जुड़ा कोई प्रमाण है तो उसे CBI, ED या राज्य पुलिस को सौंपा जाना चाहिए।

फिलहाल हरीश रावत ने दोनों संगठनात्मक पदों से हटने की पेशकश की है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से उनकी पेशकश स्वीकार किए जाने की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में वह फिलहाल कांग्रेस के सदस्य बने हुए हैं और मामला केवल उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जुड़ा है।

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