ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में बड़ी प्रगति, 5.2 किमी सहायक सुरंग आर-पार; 2 किमी हिस्से में रेल ट्रैक बिछाने का काम पूरा

पहाड़ों के भीतर बन रही इस रेल लाइन में अब सुरंगों से आगे ट्रैक बिछाने का काम भी दिखाई देने लगा है। यात्रा का समय घटने और कनेक्टिविटी बदलने का असर किन इलाकों और यात्रियों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है, आगे जानें।
Railway workers gathered inside a tunnel after a breakthrough during the Rishikesh-Karnaprayag rail project

ऋषिकेश, 11 सितंबर। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने एक और अहम पड़ाव पूरा कर लिया है। पैकेज-1 के तहत ढालवाला से नीरगड्डू के बीच करीब 5.2 किलोमीटर लंबी सहायक सुरंग को आर-पार जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही परियोजना में सुरंग निर्माण का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा हुआ।

ढालवाला से शिवपुरी तक बनने वाली पहली सुरंग की कुल लंबाई करीब 10 किलोमीटर है। इसे दो हिस्सों में विकसित किया जा रहा है। नीरगड्डू से शिवपुरी के बीच सहायक सुरंग पहले ही आर-पार हो चुकी थी। अब ढालवाला से नीरगड्डू के बीच की सहायक सुरंग भी पूरी तरह जुड़ गई है।

रेल विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार, पैकेज-1 में अब तक तीन सुरंग हिस्सों को आर-पार जोड़ा जा चुका है। इस पैकेज में अब मुख्य सुरंग का अंतिम हिस्सा जुड़ना बाकी है, जिसे जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी परियोजना में अलग-अलग सुरंगों को 42 स्थानों पर आर-पार जोड़ना है, जिनमें से अब तक 37 काम पूरे हो चुके हैं।

परियोजना में सुरंगों की खुदाई अब अंतिम चरण में पहुंच रही है। मुख्य और एस्केप सुरंगों समेत कुल करीब 213 किलोमीटर टनलिंग में से लगभग 208 किलोमीटर खुदाई पूरी हो चुकी है। परियोजना में 16 मुख्य सुरंगें करीब 104 किलोमीटर और 12 एस्केप सुरंगें करीब 98 किलोमीटर लंबी हैं।

सुरंग निर्माण के साथ ट्रैक बिछाने का काम भी आगे बढ़ रहा है। शिवपुरी से गूलर के बीच करीब दो किलोमीटर रेल ट्रैक बिछाया जा चुका है। सुरंगों के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक बनाया जा रहा है। ट्रैक बिछाने का काम इरकॉन इंटरनेशनल कर रही है।

125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का अधिकांश हिस्सा पहाड़ों के भीतर सुरंगों से होकर गुजरेगा। परियोजना में कुल 13 स्टेशन प्रस्तावित हैं। वीरभद्र और योगनगरी स्टेशन तैयार हैं, जबकि शिवपुरी, ब्यासी और आगे के अन्य स्टेशनों पर भी काम जारी है।

परियोजना में कुल 19 बड़े और महत्वपूर्ण पुल भी शामिल हैं। अलग-अलग हिस्सों में इन पुलों का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि पूरे हो चुके पुलों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में अलग बताई गई है, इसलिए अंतिम आधिकारिक संख्या की पुष्टि के बाद ही इसे निश्चित रूप से माना जाएगा।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा का समय करीब छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे रहने की उम्मीद है। पूरी परियोजना को दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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