गंगा बेसिन के 13 शहरों की नदी प्रबंधन योजनाएं पूरी, 60 शहरों तक बढ़ेगा दायरा

नदी और शहरों के संबंध को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में यह पहल आगे बढ़ रही है। योजनाओं में केवल प्रदूषण नियंत्रण ही नहीं, बल्कि बाढ़ प्रबंधन, जल निकाय संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी शहरी विकास से जोड़ा गया है।
Ram Jhula suspension bridge spanning the Ganga River in Rishikesh.

नई दिल्ली, 25 जून। गंगा बेसिन के शहरों में नदी-केंद्रित शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन(NMCG) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स(NIUA) की पहल आगे बढ़ रही है। इस पहल के तहत 13 शहरों की शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं पूरी कर ली गई हैं।

जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, Urban River Management Plan यानी URMP का उद्देश्य शहरों के विकास में नदियों को केंद्र में रखना है। इसके तहत प्रदूषण नियंत्रण, बाढ़ प्रबंधन, जल निकायों के पुनर्जीवन, नदी तटों के संरक्षण और नागरिक भागीदारी जैसे मुद्दों को शहरी योजना से जोड़ा जा रहा है।

पहले चरण के तहत गंगा बेसिन के 27 शहरों के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें से 13 शहरों की योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 12 अन्य शहरों की योजनाएं मार्च 2027 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में 33 अतिरिक्त शहरों को शामिल किया गया है। इस तरह योजना का दायरा गंगा बेसिन के 60 शहरों तक पहुंचाने की तैयारी है।

इन योजनाओं के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के शहरों को शामिल किया गया है। इनमें गंगोत्री और ऋषिकेश जैसे ऊपरी गंगा बेसिन के शहरों से लेकर हावड़ा, आसनसोल और दुर्गापुर जैसे पूर्वी क्षेत्र के शहर भी शामिल हैं।

मंत्रालय के अनुसार, जिन शहरों में योजनाएं पूरी हुई हैं, उनमें हल्द्वानी-काठगोदाम, रामनगर, ऋषिकेश, गोरखपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर, प्रयागराज, मिर्जापुर, छपरा, बक्सर और गया जैसे शहर शामिल हैं। इन योजनाओं में हर शहर की नदी, जल निकाय, स्थानीय भूगोल, सांस्कृतिक पहचान और शहरी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया है।

URMP(Urban River Management Plan) फ्रेमवर्क को पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सामाजिक भागीदारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसके तहत बाढ़ क्षेत्र के नियमन, प्रदूषण में कमी, वेटलैंड और जल निकायों के पुनर्जीवन, नदी किनारे हरित क्षेत्र, उपचारित जल के दोबारा उपयोग और पर्यावरण-संवेदनशील नदी तट विकास जैसे बिंदुओं पर काम किया जाएगा।

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उत्तराखंड में हल्द्वानी-काठगोदाम, रामनगर और ऋषिकेश की योजनाओं में शहरों और नदियों के संबंध को मजबूत करने, सतत पर्यटन, जल निकायों के संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर दिया गया है। ऋषिकेश जैसे शहरों में सीवरेज सुधार, फीकल स्लज मैनेजमेंट, वेटलैंड और सहायक नदियों के संरक्षण जैसे पहलुओं को भी योजना से जोड़ा गया है।

उत्तर प्रदेश के शहरों में बाढ़ प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और नदी तटों के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की गई हैं। प्रयागराज में संगम और उससे जुड़े सांस्कृतिक परिदृश्य को नदी आधारित विरासत क्षेत्र के रूप में देखने की सोच रखी गई है।

बिहार में बक्सर, छपरा और गया जैसे शहरों की योजनाएं नदी, संस्कृति और शहरी लचीलेपन के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर केंद्रित हैं। गया में फल्गु नदी के जल-पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल रिचार्ज, बाढ़ क्षेत्र पुनर्स्थापन और प्रदूषित नालों के उपचार जैसे बिंदुओं पर जोर दिया गया है।

NMCG का कहना है कि इस पहल का बड़ा उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों से जुड़े शहरों में नदी-संवेदनशील शहरी योजना को बढ़ावा देना है। इससे शहरों के विकास में नदियों को केवल जलधारा नहीं, बल्कि पर्यावरण, संस्कृति और स्थानीय जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में देखने की दिशा मजबूत होगी।

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