टिहरी झील रिंग रोड के लिए DPR(विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) प्रक्रिया तेज, पहले चरण में चार लंबे पुल प्रस्तावित

झील क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क संपर्क परियोजना को लेकर तकनीकी तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। पहले चरण में जिन पुलों की DPR तैयार की जाएगी, वे आने वाले समय में आसपास के गांवों की आवाजाही, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं, पूरी जानकारी खबर में पढ़ें।
Aerial view of Tehri Lake showing lakeside infrastructure and surrounding mountain terrain.

टिहरी, 25 जून। टिहरी झील के चारों ओर प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना को लेकर लोक निर्माण विभाग(PWD) ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में रिंग रोड पर चार लंबे पुलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने के लिए कंसल्टेंट चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। विभाग ने इसके लिए कंसल्टेंट कंपनियों से रुचि पत्र आमंत्रित किए हैं।

लोक निर्माण विभाग के दस्तावेज के अनुसार, टिहरी झील के चारों ओर प्रस्तावित रिंग रोड पर कुल 12 प्रमुख पुल प्रस्तावित हैं। इनमें से पहले चरण में चार पुलों की अलग DPR तैयार कराई जाएगी। इन पुलों के लिए डिजाइन, सर्वे, तकनीकी अध्ययन, लागत आकलन और निर्माण से जुड़े अन्य पहलुओं को DPR में शामिल किया जाएगा।

चार प्रस्तावित पुलों में पिपलडाली, डोबरा-चांठी, हड़कीखाला और कोटी क्षेत्र शामिल हैं। पिपलडाली में करीब 450 मीटर स्पैन का नया तीन लेन पुल प्रस्तावित है। डोबरा-चांठी में करीब 500 मीटर स्पैन का नया दो लेन पुल प्रस्तावित किया गया है। इन दोनों जगहों पर पुराने पुलों को बनाए रखते हुए नए पुलों की योजना रखी गई है।

इसके अलावा हड़कीखाला में करीब 150 मीटर स्पैन का नया तीन लेन पुल और कोटी में करीब 370 मीटर स्पैन का नया तीन लेन पुल प्रस्तावित है। फिलहाल ये स्पैन संभावित हैं और अंतिम डिजाइन DPR तैयार होने के बाद स्पष्ट होगा।

टिहरी बांध जलाशय करीब 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। बांध बनने के बाद पुराने टिहरी शहर के आसपास की कई पुरानी सड़कें जलाशय में डूब गई थीं। इसके चलते झील के आसपास बसे कई गांवों के लोगों को आज भी कई स्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

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प्रस्तावित रिंग रोड की लंबाई करीब 170 किलोमीटर बताई गई है। इस मार्ग के बनने से झील के चारों ओर सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होने के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

विभागीय दस्तावेज में कहा गया है कि दो लेन रिंग रोड बनने से टिहरी गढ़वाल जिले के 173 गांवों की करीब 84 हजार आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए भी यह मार्ग मुख्य या वैकल्पिक रास्ते के रूप में उपयोगी हो सकता है।

देहरादून से करीब 115 किलोमीटर दूर स्थित टिहरी झील को सरकार पर्यटन और एडवेंचर वाटर एक्टिविटी के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। रिंग रोड और लंबे पुलों की DPR प्रक्रिया को इसी दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

टिहरी झील उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यह झील भागीरथी नदी पर बने ऊंचे टिहरी बांध के जलाशय से बनी है और अपनी विशाल जलराशि, पहाड़ी नजारों और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है। टिहरी बांध देश की महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल है, जबकि टिहरी झील आज वाटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, साहसिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार की नई संभावनाओं का बड़ा केंद्र बन रही है।

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