देहरादून, 25 जून। उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के शिक्षकों के तबादलों को लेकर शासन स्तर से अहम निर्णय लिया गया है। गंभीर बीमारी और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर आए तबादला प्रस्तावों पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि सुगम-दुर्गम श्रेणी में अनुरोध के आधार पर तबादला चाहने वाले शिक्षकों को अभी इंतजार करना होगा।
शासन स्तर से जारी निर्देशों के अनुसार, उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर शिक्षा विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं। धारा-27 के तहत शासन को भेजे गए प्रस्तावों पर अब स्थानांतरण अधिनियम की धारा 17(1)(ख) के प्रावधानों के अनुसार नियुक्ति प्राधिकारी स्तर की स्थानांतरण समितियां कार्रवाई करेंगी।
इन प्रस्तावों में माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता और सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग से जुड़े मामले शामिल हैं। शासन स्तर पर जिन प्रस्तावों का उल्लेख किया गया है, उनमें 04 प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक, 91 प्रवक्ता, 97 सहायक अध्यापक एलटी गढ़वाल मंडल और 73 सहायक अध्यापक एलटी कुमाऊं मंडल से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।
मानवीय आधारों में स्वयं शिक्षक या पति-पत्नी की गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, मानसिक रूप से अस्वस्थ या गंभीर रूप से बीमार बच्चों की देखभाल, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित परिवार और माता-पिता की गंभीर बीमारी जैसे मामले शामिल हैं। ऐसे मामलों में पात्रता और नियमों के आधार पर स्थानांतरण समितियों के माध्यम से निर्णय लिया जाएगा।
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शासन ने साफ किया है कि सुगम से दुर्गम और दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में अनुरोध आधारित स्थानांतरण से जुड़े मामलों पर फिलहाल अलग से फैसला नहीं हुआ है। इस श्रेणी के मामलों को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के परामर्श के लिए भेजा गया है। विभागीय राय मिलने के बाद ही आगे आदेश जारी किए जाएंगे।
इस फैसले से गंभीर बीमारी और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से कई शिक्षक स्वास्थ्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों और विशेष परिस्थितियों के आधार पर स्थानांतरण की मांग कर रहे थे।
शिक्षा विभाग में तबादला प्रक्रिया को लेकर हर वर्ष बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। खासकर दुर्गम क्षेत्रों में तैनात शिक्षक सुगम क्षेत्रों में तैनाती की उम्मीद रखते हैं, जबकि कुछ शिक्षक पारिवारिक या चिकित्सा कारणों से अपने गृह क्षेत्र या उपचार सुविधा के नजदीक तैनाती चाहते हैं।
फिलहाल शासन की ओर से मानवीय आधार वाले प्रस्तावों पर कार्रवाई का रास्ता खोला गया है, लेकिन सुगम-दुर्गम श्रेणी के अनुरोध वाले मामलों में शिक्षकों को कार्मिक विभाग की राय और शासन के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।
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