उत्तराखंड की प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब यात्रा आज विधि-विधान और अरदास के साथ शुरू हो गई। शनिवार दोपहर श्रद्धालुओं के लिए हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के कपाट खोल दिए गए, जिसके साथ ही इस वर्ष की यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया।
हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोविंदघाट और घांघरिया होते हुए हेमकुंड साहिब पहुंचे। इससे पहले शुक्रवार को “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष के साथ पंज प्यारों की अगुवाई में श्रद्धालुओं का जत्था गोविंदघाट से रवाना हुआ था। जत्था निशान साहिब के साथ घांघरिया पहुंचा और शनिवार सुबह हेमकुंड साहिब के लिए आगे बढ़ा।
गोविंदघाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह के अनुसार, सुबह गुरुग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुवाई में सचखंड से दरबार साहिब में सुशोभित किया गया। इसके बाद सुखमणी साहिब का पाठ, शबद कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
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पूर्वाह्न 11:30 बजे शबद कीर्तन हुआ और दोपहर करीब 12:30 बजे हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके बाद गुरुद्वारे में पहली अरदास की गई और हुक्मनामा लिया गया।
समुद्र तल से करीब 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब सिख धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु कठिन हिमालयी यात्रा के बाद यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं।
यात्रा को लेकर प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से सुरक्षा, स्वास्थ्य और यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं।
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