हल्द्वानी, 16 अक्टूबर। कैंची धाम में बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक जाम को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। नैनीताल जिला प्रशासन ने इसका प्रस्ताव उत्तराखंड पर्यटन विभाग को भेज दिया है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी।
प्रस्ताव के मुताबिक कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तराखंड पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर अलग रजिस्ट्रेशन विंडो बनाई जाएगी। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए आने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रोजाना दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तय करने की योजना है। फिलहाल एक दिन में करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की सीमा रखने का प्रस्ताव है। तय संख्या पूरी होने पर उस दिन का रजिस्ट्रेशन बंद किया जा सकता है और श्रद्धालुओं को अगली तारीख चुनने का विकल्प मिलेगा।
रजिस्ट्रेशन के दौरान श्रद्धालुओं से उनके ठहरने और वाहन पार्किंग की जानकारी भी मांगी जा सकती है। इससे प्रशासन को पहले से यह पता रहेगा कि कितने लोग कैंची धाम पहुंचेंगे और कितने वाहनों के लिए पार्किंग की जरूरत होगी।
भीड़ ज्यादा होने की स्थिति में कुछ वाहनों को हल्द्वानी में ही रोककर पार्किंग कराने और वहां से श्रद्धालुओं को शटल सेवा के जरिए कैंची धाम भेजने की योजना भी प्रस्ताव में शामिल है।
बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन हल्द्वानी क्षेत्र में चेक करने के लिए बैरियर लगाने की भी योजना है। हालांकि यह व्यवस्था अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों को प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन व्यवस्था से अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है। स्थानीय पहचान पत्र दिखाकर उन्हें कैंची धाम क्षेत्र में जाने की अनुमति देने की योजना है।
नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के अनुसार रजिस्ट्रेशन से जुड़ा प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेजा गया है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
हाल के वीकेंड और छुट्टियों के दौरान कैंची धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से जाम और पार्किंग की समस्या बढ़ी है। इसी दबाव को कम करने के लिए प्रशासन रजिस्ट्रेशन, दैनिक श्रद्धालु सीमा और पार्किंग प्रबंधन की नई व्यवस्था पर काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कैंची धाम में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रजिस्ट्रेशन व्यवस्था और श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करने की जरूरत बता चुके हैं।
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