पिथौरागढ़, 6 अगस्त। सीमांत पिथौरागढ़ के कारोबारियों के लिए 6 साल का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। लिपूलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन सीमा व्यापार की चरणबद्ध बहाली शुरू हो गई है। भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत की तकलाकोट मंडी पहुंच चुका है, हालांकि फिलहाल केवल पुराने पंजीकृत व्यापारियों को ही सीमा पार जाने की अनुमति दी गई है।
धारचूला के उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 20 सदस्यीय दल तकलाकोट पहुंचा है। दल में 16 पंजीकृत व्यापारी और उनके चार सहयोगी शामिल हैं।
व्यापारियों ने सबसे पहले गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में दस्तावेजों और पहचान से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद दल नाबीढांग पहुंचा, जहां व्यापारियों ने रात्रि विश्राम किया। अगले दिन लिपूलेख दर्रे पर चीनी अधिकारियों ने जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कराने के बाद भारतीय दल को तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश दिया।
पहले चरण में उन्हीं व्यापारियों को प्राथमिकता दी गई है, जो पहले से पंजीकृत हैं और वर्ष 2019 के व्यापारिक सत्र में भी तकलाकोट मंडी गए थे। इनमें कुछ ऐसे व्यापारी भी शामिल हैं, जिनका सामान सीमा व्यापार बंद होने के बाद से तकलाकोट के गोदामों में रखा हुआ है।
फिलहाल सीमा व्यापार पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। पहला दल नया व्यापारिक सामान लेकर जाने के बजाय तकलाकोट में मौजूद व्यवस्थाओं, पुराने सामान की स्थिति और आगे व्यापार शुरू करने से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने के लिए पहुंचा है। इसके बाद ही व्यापार के अगले चरण और सामान की आवाजाही को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
लिपूलेख दर्रे के रास्ते होने वाला सीमा व्यापार पिथौरागढ़ के धारचूला और आसपास के सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। स्थानीय व्यापारी तकलाकोट मंडी में भारतीय सामान बेचते थे और वहां से तिब्बती तथा चीनी उत्पाद लेकर लौटते थे। इस गतिविधि से सामान ढुलाई, परिवहन, आवास और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलता था।
कोविड-19 के कारण वर्ष 2020 में यह व्यापार बंद हो गया था। इसके बाद स्थानीय व्यापारी लगातार व्यापार दोबारा शुरू करने की मांग कर रहे थे। अब करीब छह साल बाद भारतीय दल के सीमा पार पहुंचने से सीमांत क्षेत्र के कारोबारियों में नई उम्मीद जगी है।
आने वाले दिनों में व्यापार का दायरा बढ़ाने, सामान ले जाने और नए व्यापारियों को अनुमति देने का निर्णय दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तय होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल पहले दल की तकलाकोट यात्रा को सीमा व्यापार की वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।
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