उत्तराखंड में मौसम का अलर्ट, देहरादून-हरिद्वार समेत सात जिलों में तेज बारिश की चेतावनी

लगातार सक्रिय मानसून का असर केवल बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यात्रा, सड़क संपर्क, खेती और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। किन जिलों में सबसे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, किन जोखिमों की आशंका जताई गई है और मौसम का यह दौर कब तक बना रह सकता है, जानिए...
Vehicles moving through heavy rainfall on a hill road in Uttarakhand amid worsening weather conditions.

देहरादून। उत्तराखंड में मानसूनी बारिश का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून की ओर से जारी जिला-स्तरीय पूर्वानुमान में 10 जुलाई को राज्य के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। कुछ जिलों में वर्षा के तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर को लेकर चेतावनी भी जारी की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, 10 जुलाई को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और चम्पावत जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इन जिलों में गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और बारिश के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर की भी संभावना है। राज्य के बाकी जिलों में भी कहीं-कहीं तेज बारिश और गरज-चमक का असर देखने को मिल सकता है।

11 जुलाई को देहरादून, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर, चम्पावत, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। पर्वतीय जिलों में गरज के साथ आकाशीय बिजली और वर्षा के तीव्र दौर बन सकते हैं। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भी कहीं-कहीं गरज-चमक की चेतावनी दी गई है।

12 जुलाई को बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चम्पावत जिलों में सतर्कता बरतने की जरूरत रहेगी। 13 जुलाई को बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़, जबकि 14 जुलाई को देहरादून, चम्पावत, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं मौसम तीखा रुख दिखा सकता है।

सात दिन के पूर्वानुमान के अनुसार, 11 जुलाई को कुमाऊं मंडल के अधिकांश जिलों और गढ़वाल मंडल के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 12 और 13 जुलाई को पर्वतीय जिलों में अनेक स्थानों पर, जबकि मैदानी जिलों में कुछ जगहों पर बारिश के आसार हैं। 14 से 16 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा का क्रम जारी रह सकता है।

मौसम विभाग ने चेताया है कि तेज वर्षा के दौरान संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने जैसी स्थिति बन सकती है। कहीं-कहीं नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में जलभराव और यात्रा समय बढ़ने की भी आशंका है।

फ्लैश फ्लड रिस्क आउटलुक में अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चम्पावत, देहरादून, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में अगले 24 घंटों के दौरान कम से मध्यम स्तर के अचानक बाढ़ जोखिम की संभावना जताई गई है। यह जोखिम पूरे जिले में नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों और निचले इलाकों में ज्यादा रह सकता है।

चारधाम यात्रा या अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की गई है। लगातार बारिश के दौरान खड़ी ढलानों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदी-नालों के आसपास विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

नदी, नालों और निचले इलाकों के पास रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गरज और आकाशीय बिजली के दौरान लोगों से पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों में रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने और बिजली संचालित वस्तुओं से दूर रहने की अपील की गई है।

किसानों से खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करने और कटी हुई फसल को सुरक्षित व सूखे स्थान पर रखने को कहा गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम से लेकर अत्यंत कम तक दर्ज किया गया।

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