उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए खोल दिया गया है। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच के लिए प्रसिद्ध यह ट्रेक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए खास माना जाता है।
जानकारी के अनुसार, सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर जाने के लिए सबसे पहले ऋषिकेश से करीब 247 किलोमीटर की दूरी तय कर जोशीमठ पहुंचना होता है। इसके बाद ज्योतिर्मठ से करीब 47.2 किलोमीटर दूर माणा गांव पहुंचा जाता है। माणा गांव से सतोपंथ की ओर करीब 26 किलोमीटर लंबा पैदल ट्रेक शुरू होता है।
ट्रेक पर जाने के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य है। यह अनुमति ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है। अनुमति से पहले पर्यटकों को ज्योतिर्मठ में स्वास्थ्य परीक्षण कराना होता है।
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अधिकारियों के अनुसार, ट्रेकिंग के दौरान पर्यटकों को टूर ऑपरेटर और गाइड के साथ जाना जरूरी है। इसके अलावा टेंट, भोजन, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पर्यटकों को स्वयं करनी होंगी।
सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक धार्मिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि बदरीनाथ धाम से आगे स्थित माणा गांव से ही पांडव स्वर्ग की ओर रवाना हुए थे। इसी मार्ग पर भीम पुल, लक्ष्मी वन, सहस्रधारा, चक्रतीर्थ और सतोपंथ झील जैसे प्रमुख पड़ाव आते हैं।
स्वर्गारोहिणी क्षेत्र की ट्रेकिंग सामान्य रूप से सतोपंथ झील तक की जाती है। यहां से पर्यटक दूर से स्वर्ग की सीढ़ी के दर्शन करते हैं। सतोपंथ झील से आगे का मार्ग कठिन माना जाता है और यह क्षेत्र उच्च हिमालयी परिस्थितियों वाला है।
सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक बर्फीले ग्लेशियरों, ऊंचे पर्वतों और पौराणिक स्थलों से होकर गुजरता है। इसे चमोली जिले के प्रमुख उच्च हिमालयी ट्रेकों में शामिल किया जाता है। ट्रेक खुलने के बाद साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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