उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। परियोजना के पहले चरण में जून 2028 तक ब्यासी तक ट्रेन संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि दिसंबर 2029 तक रेल सेवा को कर्णप्रयाग तक पहुंचाने की योजना है।
रेलवे की स्थायी संसदीय समिति ने हाल ही में परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान आरवीएनएल अधिकारियों ने समिति को अब तक हुए निर्माण कार्यों की जानकारी दी।
करीब 125 km लंबी यह रेल परियोजना गढ़वाल क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके पूरा होने के बाद देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जुड़ेंगे। यह परियोजना पर्यटन, तीर्थाटन, स्थानीय आवागमन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।
परियोजना में कुल 13 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। वर्तमान में योगनगरी ऋषिकेश और बीरभद्र स्टेशन से रेल संचालन हो रहा है, जबकि शिवपुरी और ब्यासी स्टेशन पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। अन्य स्टेशनों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सुरंग निर्माण है। कुल रेल मार्ग का लगभग 104 km हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा, जो पूरी परियोजना का करीब 83% है। इसमें 16 मुख्य सुरंगें और 12 एस्केप टनल बनाई जा रही हैं।
आरवीएनएल के अनुसार, 16 में से 13 मुख्य सुरंगों की खोदाई पूरी हो चुकी है। लगभग 98 km सुरंग निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जो कुल सुरंग कार्य का करीब 95% है। इसके अलावा 19 प्रमुख रेलवे पुलों में से 8 पुलों का निर्माण पूरा हो गया है।
ढालवाला से शिवपुरी के बीच 10.8 km लंबी सुरंग का काम अभी जारी है। पहाड़ी भूगर्भीय परिस्थितियों, मौसम और निर्माण सामग्री पहुंचाने जैसी चुनौतियों के कारण परियोजना का काम काफी कठिन माना जा रहा है।
परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यात्रा अवधि करीब 6 घंटे से घटकर लगभग 2.5 घंटे रह जाएगी। इससे चारधाम यात्रा, पर्यटन, व्यापार और स्थानीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक, सिविल, ओपी मालगुड़ी के अनुसार परियोजना के तहत जून 2028 तक ब्यासी तक ट्रेन संचालन शुरू करने और दिसंबर 2029 तक कर्णप्रयाग तक रेल सेवा पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पहले इस परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए अब दिसंबर 2029 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
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