अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योगमय हुआ उत्तराखंड

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सामूहिक योगाभ्यास और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस वर्ष की थीम और प्रदेशभर में हुए आयोजनों की खास बातें क्या रहीं, जानिए।
चंपावत के बनबसा मिनी स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम

देहरादून 21 जून 2026।12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार को उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक अलग-अलग जिलों में योग शिविर आयोजित किए गए, जहां लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

प्रदेश का मुख्य कार्यक्रम चंपावत जिले के बनबसा स्थित मिनी स्टेडियम में रखा गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए और योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में लोगों ने आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।

योग दिवस को लेकर देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी और अन्य जिलों में भी सुबह से कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। स्कूल-कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों, गंगा घाटों, पुलिस लाइन, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से आयोजित शिविरों में विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों ने हिस्सा लिया।

इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ यानी ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ रखी गई है। इसका उद्देश्य योग को स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन से जोड़ना है। आयोजनों में लोगों को बताया गया कि नियमित योग शरीर को मजबूत बनाने के साथ मानसिक तनाव कम करने और जीवन में अनुशासन लाने में भी मदद करता है।

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उत्तराखंड में योग दिवस का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि ऋषिकेश को योग की वैश्विक पहचान से जोड़ा जाता है। ऋषिकेश पहले से ही योग की वैश्विक राजधानी के रूप में जाना जाता है, ऐसे में पूरे प्रदेश में योग दिवस का उत्साह राज्य की इसी पहचान को और मजबूत करता दिखाई दिया।

राज्य की आध्यात्मिक परंपरा, प्राकृतिक वातावरण और योग-साधना की पुरानी विरासत इसे योग और वेलनेस के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करती है।

योग दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में हुए कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की निरंतर साधना है। आयोजकों ने लोगों से अपील की कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और परिवार व समाज में भी इसके प्रति जागरूकता बढ़ाएं।

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