हल्द्वानी, 22 जून। कैलास मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। उत्तराखंड के लिपुलेख रूट से यात्रा के लिए इस बार 10 बैच प्रस्तावित हैं। आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, पहले बैच के यात्री 30 जून को दिल्ली पहुंचेंगे और 4 जुलाई को टनकपुर से उत्तराखंड रूट पर आगे बढ़ेंगे।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, पहले दल की दिल्ली में पासपोर्ट, वीजा फीस और मेडिकल जांच से जुड़ी प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू होगी। 2 जुलाई को आईटीबीपी बेस अस्पताल में मेडिकल जांच होगी, जबकि 3 जुलाई को विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग, चीनी वीजा, विदेशी मुद्रा और केएमवीएन फीस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद दल 4 जुलाई को टनकपुर पहुंचेगा।
लिपुलेख रूट पर कैलास मानसरोवर यात्रा की अवधि करीब 22 दिन रखी गई है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 10वां और अंतिम बैच 5 अगस्त को दिल्ली पहुंचेगा और 26 अगस्त को नई दिल्ली लौटेगा। इस तरह लिपुलेख रूट पर यात्रा कार्यक्रम 30 जून से 26 अगस्त तक चलेगा।
यात्रियों के लिए सामान और स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रत्येक यात्री को 20 किलोग्राम तक व्यक्तिगत सामान ले जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा हर बैच को प्रति यात्री पांच किलोग्राम के हिसाब से कॉमन सामान ले जाने की मंजूरी दी गई है। इस सामान का उपयोग चीन की ओर खाने-पीने और अन्य जरूरी सामग्री ले जाने के लिए किया जाएगा। तय सीमा से अधिक सामान होने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
यात्रा के दौरान हर बैच के साथ पांच सदस्यों की सर्विस टीम रहेगी। इसमें एक डॉक्टर और चार रसोइए शामिल होंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी जरूरी और नियमित दवाएं पर्याप्त मात्रा में साथ रखें। यात्रा के दौरान यदि डॉक्टर और संपर्क अधिकारी किसी यात्री को आगे बढ़ने के लिए फिट नहीं मानते हैं, तो उनका निर्णय अंतिम माना जाएगा।
गाइडलाइंस के अनुसार, यात्री ऐहतियात के तौर पर जरूरी दवाएं साथ रख सकेंगे। इनमें बुखार, पेट, खांसी, कमजोरी, ऊंचाई पर होने वाली परेशानी, प्राथमिक उपचार और संक्रमण से जुड़ी दवाएं शामिल हैं। होम्योपैथी दवाओं का उपयोग करने वाले यात्री अपनी संबंधित दवाएं साथ रख सकेंगे।
कुमाऊं मंडल विकास निगम(KMVN) यात्रा के दौरान यात्रियों के ठहरने, भोजन और परिवहन से जुड़ी व्यवस्था संभालेगा। केएमवीएन के महाप्रबंधक मनीष कुमार सिंह के अनुसार, मंत्रालय की ओर से यात्रा का शेड्यूल और अन्य जरूरी जानकारी जारी की गई है। यात्रा पार्टनर होने के नाते निगम यात्रियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं करेगा।
कैलास मानसरोवर यात्रा ऊंचाई वाले कठिन हिमालयी क्षेत्रों से गुजरती है। इसलिए इस यात्रा में स्वास्थ्य जांच, फिटनेस और सुरक्षा नियमों को सबसे अधिक महत्व दिया जा रहा है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग और पड़ावों पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।
कैलाश मानसरोवर चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है, जिसका हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में विशेष महत्व है। कैलाश पर्वत समुद्र तल से लगभग 6,638 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हिंदू मान्यता के अनुसार इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है। वहीं, मानसरोवर झील को आस्था, पवित्रता और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। ऊंचाई, कठिन मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण यह यात्रा श्रद्धा के साथ-साथ शारीरिक क्षमता और मानसिक धैर्य की भी परीक्षा मानी जाती है।




