देहरादून। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलग्रहण विकास घटक-2.0 के तहत चल रही परियोजनाओं को केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता मिली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए राज्य को 31.58 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इसमें से 15.79 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर योजना की प्रगति और सहायता राशि की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री धामी ने इसके लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री का आभार जताया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलग्रहण विकास घटक-2.0 के तहत उत्तराखंड में 15 जलग्रहण विकास परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से 0.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का उपचार किया जाना है। परियोजनाओं का उद्देश्य जल संरक्षण, भूमि उपचार, वर्षा जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करना है।
इन परियोजनाओं की कुल लागत 232.26 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 209.03 करोड़ रुपये निर्धारित है। अब तक राज्य को 106.05 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। नई स्वीकृति से परियोजनाओं के काम को गति मिलने की उम्मीद है।
योजना की मूल अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी। जलग्रहण विकास कार्यों को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने परियोजना अवधि को सितंबर 2026 तक अस्थायी रूप से बढ़ाया है, ताकि स्वीकृत कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूरा किया जा सके।
यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में जुलाई में फिर बढ़ेगा बिजली बिल, घरेलू से उद्योग तक सभी श्रेणियों पर पड़ेगा असर
अतिरिक्त राशि से जलग्रहण विकास परियोजनाओं का संचालन सुचारू रूप से जारी रखा जा सकेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने और वर्षा जल के बेहतर उपयोग के लिहाज से ये परियोजनाएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
प्रस्तावित जलग्रहण विकास घटक-3.0 में राज्यों को परियोजनाओं का आवंटन उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। इसमें स्वीकृत परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, केंद्रीय सहायता के प्रभावी उपयोग और परियोजनाओं की पूर्णता जैसे मानकों को महत्व दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से संबंधित विभागों और क्षेत्रीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश देने को कहा है, ताकि स्वीकृत परियोजनाओं का जल्द क्रियान्वयन हो और उपलब्ध कराई गई केंद्रीय सहायता का प्रभावी व पारदर्शी उपयोग किया जा सके।
उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण लंबे समय से बड़ी जरूरत रहा है। बारिश पर निर्भर खेती, सूखते जल स्रोत और मिट्टी कटाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए जलग्रहण विकास परियोजनाएं ग्रामीण आजीविका और कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में मददगार हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें: देहरादून में तेज बारिश से बदला मौसम, उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में पहुंचा मानसून




