पौड़ी की अंकिता ध्यानी ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में जीता स्वर्ण, एशियाई खेल 2026 का मानक पार

भुवनेश्वर में दो पदक जीतकर अंकिता ध्यानी ने उत्तराखंड एथलेटिक्स को बड़ी उपलब्धि दिलाई। 3000 मीटर स्टीपलचेज में उनका समय एशियाई खेल 2026 के मानक से बेहतर कैसे रहा, जानिए।
3000 मीटर स्टीपलचेज में बाधा पार करती महिला धावक

देहरादून, 30 जून 2026। उत्तराखंड की धाविका अंकिता ध्यानी ने 65वीं राष्ट्रीय इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया है। भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में हुई प्रतियोगिता में अंकिता ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण पदक जीता और एशियाई खेल 2026 के लिए तय क्वालीफाइंग मानक भी पार किया।

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आधिकारिक परिणामों के अनुसार, महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज में अंकिता ध्यानी 9 मिनट 44.05 सेकंड के समय के साथ पहले स्थान पर रहीं। उत्तर प्रदेश की खुशबू गुप्ता ने 10 मिनट 36.47 सेकंड के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि राजस्थान की कुमारी परू 10 मिनट 52.28 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

स्टीपलचेज लंबी दूरी की ऐसी दौड़ होती है, जिसमें धावकों को ट्रैक पर लगी बाधाओं और पानी की बाधा को पार करते हुए रेस पूरी करनी होती है। 3000 मीटर स्टीपलचेज में सिर्फ रफ्तार ही नहीं, बल्कि सहनशक्ति, संतुलन और लगातार लय बनाए रखने की क्षमता भी अहम होती है।

1500 मीटर में भी जीता रजत पदक

3000 मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा अंकिता ध्यानी ने 1500 मीटर दौड़ में भी रजत पदक हासिल किया। उन्होंने 1500 मीटर की रेस 4 मिनट 20.78 सेकंड में पूरी की।

इस स्पर्धा में उत्तर प्रदेश की पारुल चौधरी पहले स्थान पर रहीं। हरियाणा की पूजा तीसरे स्थान पर रहीं। अंकिता का यह प्रदर्शन इसलिए खास है क्योंकि इन्होंने एक ही प्रतियोगिता में उत्तराखंड को दो पदक दिलाए।

एशियाई खेल 2026 के लिए क्यों अहम है यह प्रदर्शन

एशियाई खेल 2026 के लिए महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज का क्वालीफाइंग मानक 9 मिनट 47.53 सेकंड तय है। अंकिता ध्यानी ने 9 मिनट 44.05 सेकंड का समय निकालकर इस मानक को पार किया है।

हालांकि अंतिम टीम चयन की आधिकारिक सूची बाद में जारी होगी, लेकिन इस प्रदर्शन ने अंकिता की दावेदारी को मजबूत कर दिया है। एशियाई खेल 2026 जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने हैं।

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उत्तराखंड ने प्रतियोगिता में जीते कुल पांच पदक

इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने कुल पांच पदक जीते। इनमें 1 स्वर्ण, 3 रजत और 1 कांस्य पदक शामिल है।

अंकिता ध्यानी के स्वर्ण और रजत पदक के अलावा उत्तराखंड की सोनिया ने 10000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता। चंपावत के सचिन बोहरा ने हाफ मैराथन रेस वॉक में रजत पदक हासिल किया। वहीं हरिद्वार की लिली दास ने 800 मीटर महिला वर्ग में कांस्य पदक जीता।

पौड़ी की बेटी ने राष्ट्रीय ट्रैक पर बढ़ाया उत्तराखंड का मान

अंकिता ध्यानी मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल से आती हैं। पहाड़ की जमीन से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना उनके सफर को और खास बनाता है।

उनकी यह जीत उत्तराखंड के खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि है। खासकर पहाड़ की बेटियों के लिए यह प्रदर्शन प्रेरणा की तरह है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंकिता ने राष्ट्रीय ट्रैक पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

अंकिता ध्यानी ने 3000 मीटर स्टीपलचेज में एशियाई खेल 2026 का क्वालीफाइंग मानक पार कर लिया है। अब नजर भारतीय एथलेटिक्स टीम की अंतिम चयन प्रक्रिया पर रहेगी।

फिलहाल भुवनेश्वर की इस जीत ने अंकिता को एशियाई खेल 2026 की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला दिया है। उत्तराखंड के लिए भी यह प्रतियोगिता यादगार रही, जहां राज्य के खिलाड़ियों ने कुल पांच पदक जीतकर अपनी तैयारी और क्षमता साबित की।

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