उत्तराखंड में आज से लागू हुई वीबी-जी राम-जी योजना, ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार से जुड़ी व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। नई प्रणाली के तहत रोजगार के साथ स्थानीय विकास, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और आजीविका से जुड़े कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। नई योजना के तहत किसे लाभ मिलेगा, रोजगार कैसे मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है, जानिए।
Rural workers engaged in community development work in a Uttarakhand village under a rural employment programme.

देहरादून। उत्तराखंड में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जी राम-जी योजना आज से लागू हो गई है। नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह योजना मनरेगा की जगह लागू की गई है।

केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम-जी अधिनियम को 1 जुलाई 2026 से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने भी मंगलवार को गजट नोटिफिकेशन जारी कर योजना लागू करने का रास्ता साफ कर दिया।

योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ स्थानीय विकास कार्यों को भी जोड़ा गया है। इसमें कुल 318 प्रकार के अनुमन्य कार्य शामिल किए गए हैं। इन कार्यों में जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, ग्रामीण आजीविका, आपदा राहत, जलवायु अनुकूलन, मरम्मत और रखरखाव से जुड़े कार्य शामिल रहेंगे।

केंद्र की ओर से तय कार्य सूची में जल सुरक्षा और जल संरक्षण से जुड़े 107 कार्य, ग्रामीण आधारभूत ढांचे से जुड़े 88 कार्य, ग्रामीण आजीविका से जुड़े 86 कार्य और आपदा राहत व जलवायु लचीलापन से जुड़े 37 कार्य शामिल हैं। कुल कार्यों में 97 कार्य ऐसे भी हैं, जो मरम्मत और रखरखाव की प्रकृति के हैं।

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नई योजना लागू होने के बाद पुराने मनरेगा जॉब कार्ड वाले श्रमिकों को तुरंत नया कार्ड बनवाने की बाध्यता नहीं होगी। जिन श्रमिकों के मनरेगा जॉब कार्ड का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, वे नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे। जिन ग्रामीण परिवारों के पास जॉब कार्ड नहीं है, वे ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण करा सकेंगे।

योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम के लिए रोजगार मांग सकेंगे। रोजगार समय पर उपलब्ध न होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान भी रखा गया है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इस योजना का असर गांवों में रोजगार के साथ-साथ जल स्रोतों, ग्रामीण रास्तों, सामुदायिक ढांचे, आजीविका और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों पर देखने को मिल सकता है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और स्थानीय आजीविका को मजबूती मिलेगी।

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