उत्तराखंड UCC पोर्टल पर AI से होगी दस्तावेजों की जांच, फर्जी पंजीकरण पर लगेगी रोक

उत्तराखंड में UCC पोर्टल पर अब AI आधारित डीपफेक वेरिफिकेशन सिस्टम जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल छेड़छाड़ की पहचान कर ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना है।
उत्तराखंड के UCC पोर्टल पर AI आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली को दर्शाता संयुक्त दृश्य।

देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता यानी UCC से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल को और सुरक्षित बनाने की तैयारी है। अब पोर्टल पर जमा होने वाले दस्तावेजों की जांच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक की मदद ली जाएगी। इसका मकसद फर्जी दस्तावेजों, डिजिटल छेड़छाड़ और डीपफेक जैसी तकनीकों के दुरुपयोग को रोकना है।

UCC पोर्टल पर AI आधारित डीपफेक वेरिफिकेशन सिस्टम जोड़ा जा रहा है। यह सिस्टम दस्तावेजों और पहचान से जुड़े विवरणों की जांच में मदद करेगा। किसी आवेदन में फोटो, पहचान या दस्तावेज से संबंधित संदिग्ध बदलाव मिलने पर सिस्टम उसे चिह्नित कर सकेगा, जिसके बाद संबंधित स्तर पर आगे की जांच की जाएगी।

उत्तराखंड में UCC पोर्टल के जरिए विवाह, तलाक या विवाह शून्यता और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े पंजीकरण की व्यवस्था दी गई है। इसके अलावा उत्तराधिकार से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी पोर्टल के माध्यम से पूरा करने की व्यवस्था है। ऐसे में पोर्टल पर अपलोड होने वाले दस्तावेजों की प्रमाणिकता प्रशासन के लिए बेहद अहम हो जाती है।

डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था में आवेदन के साथ कई तरह के दस्तावेज जमा किए जाते हैं। इनमें पहचान, निवास, आयु, संबंध और वैवाहिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। अगर किसी दस्तावेज में छेड़छाड़ की गई हो या गलत पहचान के आधार पर आवेदन किया गया हो, तो इससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए पोर्टल की तकनीकी जांच प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।

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नई व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदनों की प्राथमिक जांच तेज और अधिक सटीक होने की उम्मीद है। AI आधारित सिस्टम संदिग्ध दस्तावेजों, बदली हुई फोटो, डिजिटल एडिटिंग या डीपफेक जैसे संकेतों को पहचानने में मदद करेगा। इससे गलत दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने की कोशिशों पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाई जा सकेगी।

इस तकनीक से उन आवेदनों को भी अलग चिह्नित किया जा सकेगा, जिनमें मैनुअल जांच की जरूरत होगी। यानी हर संदिग्ध मामले में अंतिम निर्णय अधिकारी स्तर पर जांच के बाद ही लिया जाएगा, लेकिन AI सिस्टम ऐसे मामलों को जल्दी पकड़ने में मदद कर सकता है। इससे जांच प्रक्रिया का बोझ कम होगा और वास्तविक आवेदकों के आवेदन तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

UCC पोर्टल को राज्य में नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए तैयार किया गया है। पोर्टल पर आवेदन, दस्तावेज अपलोड करने और प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जा रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण होने पर न केवल प्रशासनिक परेशानी बढ़ती है, बल्कि इससे कानूनी विवाद की स्थिति भी पैदा हो सकती है। विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार जैसे मामलों में दस्तावेजों की सही जांच इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इनसे नागरिकों के अधिकार और कानूनी स्थिति सीधे जुड़ी होती है।

राज्य सरकार UCC पोर्टल के जरिए सेवाओं को ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने पर जोर दे रही है। AI आधारित जांच व्यवस्था जुड़ने के बाद पोर्टल की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल इसे UCC पोर्टल की डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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