हरिद्वार। कांवड़ मेला 2026 को लेकर हरिद्वार पुलिस ने यातायात व्यवस्था की तैयारी तेज कर दी है। मेले में पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए इस बार ट्रैफिक प्लान पुराने स्नान पर्वों के अनुभवों के आधार पर तैयार किया जाएगा। पुलिस का फोकस वन-वे व्यवस्था, रूट डायवर्जन और पार्किंग प्रबंधन पर रहेगा, ताकि भीड़ बढ़ने पर शहर और हाईवे पर यातायात व्यवस्था सुचारू रखी जा सके।
हरिद्वार पुलिस पूर्णिमा और सोमवती अमावस्या स्नान पर्वों के दौरान सामने आई चुनौतियों का अध्ययन कर रही है। इन स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर यातायात दबाव बढ़ा था। अब उन्हीं अनुभवों को कांवड़ मेले की ट्रैफिक योजना में शामिल किया जाएगा।
कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालु हरकी पैड़ी और अन्य गंगा घाटों से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। इस दौरान शहर के अंदरूनी मार्गों के साथ दिल्ली-देहरादून हाईवे, रुड़की, बहादराबाद, लक्सर और आसपास के मार्गों पर वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
पुलिस की कोशिश है कि भीड़ बढ़ने की स्थिति में श्रद्धालुओं और सामान्य वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग तरीके से नियंत्रित किया जाए। जिन रूटों पर दबाव अधिक रहेगा, वहां जरूरत के हिसाब से वन-वे व्यवस्था लागू की जा सकती है। इसके साथ ही शहर में अनावश्यक वाहनों का प्रवेश रोकने और वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों तक भेजने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
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कांवड़ मेले में पार्किंग व्यवस्था हमेशा बड़ी चुनौती रहती है। बाहरी क्षेत्रों में पार्किंग स्थलों को सक्रिय कर वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रखने की तैयारी की जा रही है। इससे हर की पौड़ी और प्रमुख घाटों की ओर जाने वाले रास्तों पर पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।
ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए डायवर्जन प्वाइंट भी चिन्हित किए जाएंगे। पुलिस उन स्थानों पर विशेष नजर रखेगी, जहां पिछले स्नान पर्वों के दौरान जाम या भीड़ नियंत्रण की समस्या सामने आई थी। ऐसे इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और रियल टाइम स्थिति के आधार पर यातायात बदलाव की व्यवस्था की जा सकती है।
हरिद्वार जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कांवड़ यात्रा शिवभक्तों की वार्षिक यात्रा है, जिसमें कांवड़िए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री जैसे स्थानों से गंगाजल लेने पहुंचते हैं। यह यात्रा श्रावण माह यानी जुलाई-अगस्त के दौरान होती है। इसी कारण हरिद्वार में कांवड़ मेले के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
पुलिस-प्रशासन की ओर से भीड़ के दबाव और रूट की स्थिति को देखते हुए यातायात व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि कांवड़ियों की यात्रा सुगम रहे और स्थानीय लोगों को भी कम से कम परेशानी हो। इसके लिए पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के साथ तैयारी की जा रही है।
फिलहाल कांवड़ मेले को लेकर हरिद्वार में तैयारियों का दौर तेज है। पिछले स्नान पर्वों से मिले अनुभवों के आधार पर पुलिस ऐसा ट्रैफिक प्लान तैयार करने में जुटी है, जिससे संभावित भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की आवाजाही सुरक्षित और व्यवस्थित बनी रहे।
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