दून-दिल्ली मार्ग पर हाइड्रोजन बसें चलाने की तैयारी, निगम बोर्ड के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

देहरादून-दिल्ली मार्ग पर स्वच्छ ईंधन आधारित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में यह योजना अभी शुरुआती चरण में है। हाइड्रोजन बसों के संचालन से पहले ईंधन ढांचा, बजट, बोर्ड की मंजूरी और तकनीकी तैयारियां पूरी करनी होंगी। जानिए इस प्रस्ताव में क्या शामिल है और यात्रियों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
A hydrogen fuel cell bus displayed at a hydrogen refuelling station with Uttarakhand Transport Corporation officials inspecting the proposed clean public transport system.

देहरादून, 13 जुलाई। उत्तराखंड परिवहन निगम ने देहरादून-दिल्ली मार्ग पर हाइड्रोजन बसें चलाने की तैयारी शुरू की है। निगम अब योजना की संभावित लागत और जरूरी व्यवस्थाओं का आकलन करेगा। इसके बाद प्रस्ताव तैयार कर परिवहन निगम बोर्ड के सामने रखा जाएगा।

यह योजना अभी शुरुआती स्तर पर है। हाइड्रोजन बसों की खरीद, संख्या, ईंधन भरने की व्यवस्था और संचालन की समयसीमा पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से वित्तीय सहायता भी मांगी जाएगी।

नौ से 11 जुलाई तक गुजरात के गांधीनगर में आयोजित ‘प्रवास 5.0’ प्रदर्शनी में उत्तराखंड परिवहन निगम के संचालन और तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। प्रदर्शनी में सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी नई बसों, तकनीकों और निगरानी प्रणालियों के मॉडल पेश किए गए। यह आयोजन बस एंड कार ऑपरेटर्स कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से किया गया था।

प्रदर्शनी के बाद निगम ने दो मॉडल अपनी योजना में शामिल किए हैं। इनमें पहला हाइड्रोजन बसों से जुड़ा है, जबकि दूसरा बसों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए कमांड एवं नियंत्रण केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।

निगम की शुरुआती योजना हाइड्रोजन बसों को दून-दिल्ली मार्ग पर चलाने की है। अधिकारियों ने इस मार्ग पर हाइड्रोजन ईंधन उपलब्ध होने की संभावना को इसकी वजह बताया है। हालांकि, दिल्ली-देहरादून मार्ग पर ईंधन भरने के केंद्र या नियमित हाइड्रोजन आपूर्ति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

हाइड्रोजन ईंधन-सेल बस से संचालन के दौरान धुएं का प्रत्यक्ष उत्सर्जन नहीं होता और मुख्य रूप से जलवाष्प निकलती है। लेकिन सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षित ईंधन भंडारण, भराव केंद्र, प्रशिक्षित कर्मचारी और तकनीकी रखरखाव की व्यवस्था करनी होगी।

मूल योजना में किराया कम रखने की बात भी कही गई है, लेकिन अभी संचालन लागत या प्रस्तावित किराये का कोई विवरण जारी नहीं हुआ है। ऐसे में यात्रियों को कितना लाभ मिलेगा, यह योजना और बजट तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

कमांड सेंटर से होगी बसों की निगरानी

परिवहन निगम बसों की निगरानी के लिए एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र बनाने पर भी विचार कर रहा है। इसके माध्यम से बस की वर्तमान स्थिति, गति, तय मार्ग और रास्ते में रुकने के समय पर नजर रखी जा सकेगी।

इस व्यवस्था से उन एक्सप्रेस बसों की भी निगरानी की जाएगी, जिन्हें निर्धारित स्थानों के अलावा रास्ते में रुकने की अनुमति नहीं है। यात्रियों की शिकायतें दर्ज करने के लिए चौबीस घंटे चलने वाला टोल-फ्री नंबर शुरू करने की योजना भी है।

फिलहाल हाइड्रोजन बस सेवा और कमांड सेंटर दोनों प्रस्ताव के स्तर पर हैं। निगम बोर्ड की मंजूरी, बजट और ईंधन संबंधी ढांचा तय होने के बाद ही इनके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।

यह भी पढ़ें: नंदा की चौकी पर अस्थायी पुलिया धंसी, नवनिर्मित मुख्य पुल खोलकर यातायात किया सामान्य

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड रोडवेज का टिकट Whatsapp से होगा बुक, भुगतान और ई-टिकट की प्रक्रिया होगी आसान

हर दिन की अहम खबरें, जनहित के मुद्दों और जरूरी अपडेट का सीधा रैबार। राज्य, नीति, विकास, प्रशासन, विकास, मौसम, स्वास्थ्य और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरें।