लंदन, 13 जुलाई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर इतिहास रचते हुए इंग्लैंड को एकमात्र टेस्ट मैच में 270 रन से हरा दिया। लॉर्ड्स में खेले गए पहले महिला टेस्ट में भारत ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में दबदबा बनाते हुए चौथे दिन बड़ी जीत दर्ज की।
भारत ने इंग्लैंड को जीत के लिए 457 रन का मुश्किल लक्ष्य दिया था। जवाब में मेजबान टीम दूसरी पारी में 186 रन पर सिमट गई। पहली पारी में 115 रन की बढ़त हासिल करने वाली भारतीय टीम ने दूसरी पारी में मजबूत बल्लेबाजी के दम पर इंग्लैंड को मैच से लगभग बाहर कर दिया था।
भारत ने पहली पारी में 285 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने 83 रन की पारी खेली, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 58 और दीप्ति शर्मा ने 57 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड की पूरी टीम केवल 170 रन पर आउट हो गई।
भारतीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने पहली पारी में 37 रन देकर पांच विकेट लिए और लॉर्ड्स के सम्मान पट्ट पर अपना नाम दर्ज कराया। स्नेह राणा ने चार विकेट लेकर उनका साथ दिया। इंग्लैंड की ओर से एमी जोन्स ने 52 रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों का लंबे समय तक सामना नहीं कर सकीं।
पहली पारी में मिली बढ़त के बाद भारत ने दूसरी पारी सात विकेट पर 341 रन बनाकर घोषित की। यास्तिका भाटिया ने 113 रन की शतकीय पारी खेली और लॉर्ड्स में महिला टेस्ट शतक लगाने वाली पहली बल्लेबाज बनीं। स्मृति मंधाना ने 70 रन बनाए, जबकि ऋचा घोष ने नाबाद 50 रन की तेज पारी खेलकर भारत की बढ़त 456 रन तक पहुंचा दी।
इंग्लैंड की दूसरी पारी की शुरुआत खराब रही। क्रांति गौड़ ने पहली ही गेंद पर टैमी ब्यूमोंट को आउट कर दिया। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर इंग्लैंड के शीर्ष क्रम को दबाव में रखा।
एमी जोन्स ने 54 रन और सोफी एक्लेस्टोन ने अर्धशतकीय पारी खेलकर हार टालने की कोशिश की, लेकिन भारत की गेंदबाजी के सामने यह संघर्ष पर्याप्त नहीं रहा। स्नेह राणा ने अंतिम विकेट लेकर भारत की ऐतिहासिक जीत पूरी की।
क्रांति गौड़ ने पूरे मैच में 7 विकेट लिए। स्नेह राणा ने दोनों पारियों में मिलाकर 6 विकेट झटके, जबकि सयाली सतघरे और दीप्ति शर्मा ने भी महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं।
यह मुकाबला कई कारणों से ऐतिहासिक रहा। लॉर्ड्स में पहली बार महिला टेस्ट आयोजित किया गया और भारतीय टीम ने इसी मैच में जीत दर्ज कर अपना नाम इतिहास में शामिल कर लिया। इससे पहले इस मैदान पर महिला अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए थे, लेकिन महिला टेस्ट का आयोजन पहली बार हुआ।
यास्तिका भाटिया का शतक और क्रांति गौड़ का पांच विकेट लेना भी इस जीत के सबसे यादगार प्रदर्शन रहे। दोनों खिलाड़ियों ने पहली बार लॉर्ड्स के महिला टेस्ट सम्मान पट्ट पर जगह बनाई।
भारत की यह जीत केवल बड़े अंतर के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। टीम ने विदेशी परिस्थितियों में इंग्लैंड को चारों दिन दबाव में रखा और मैच के हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया। बल्लेबाजों ने पहली पारी में चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया, गेंदबाजों ने बढ़त दिलाई और दूसरी पारी में यास्तिका के शतक ने इंग्लैंड के सामने लगभग असंभव लक्ष्य खड़ा कर दिया।
लॉर्ड्स की यह जीत भारतीय महिला टेस्ट क्रिकेट की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है। सीमित टेस्ट मुकाबले खेलने वाली भारतीय टीम के लिए यह परिणाम लंबे प्रारूप में उसकी क्षमता और बढ़ते आत्मविश्वास का मजबूत संकेत है।
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