उत्तराखंड पुलिसकर्मियों के लिए 4600 ग्रेड पे की मांग पर अधिकार मार्च, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने दिया समर्थन

उत्तराखंड पुलिसकर्मियों के लिए 4600 ग्रेड पे की मांग एक बार फिर सार्वजनिक रूप से उठी है। देहरादून में निकले अधिकार मार्च के जरिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार से लंबित विवाद, पात्रता और पूर्व घोषणाओं पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की। जानिए यह मुद्दा क्यों अब भी चर्चा में बना हुआ है।
Supporters gather during the Uttarakhand Police 4600 grade pay rights march in Dehradun.

देहरादून, 13 जुलाई। उत्तराखंड पुलिसकर्मियों के लिए 4600 ग्रेड पे की मांग को लेकर सोमवार को देहरादून में अधिकार मार्च निकाला गया। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ग्रेड पे से जुड़े लंबित विवाद पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।

इस कार्यक्रम का आह्वान अधिवक्ता संदीप मोहन चमोली ने किया था। आयोजन को पुलिस अधिकार मार्च और अधिकार सत्याग्रह का नाम दिया गया। मार्च में आम आदमी पार्टी, उत्तराखंड क्रांति दल और अन्य राजनीतिक तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर पुलिसकर्मियों की मांग का समर्थन किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक सेवा पूरी करने वाले पुलिसकर्मियों को 4600 ग्रेड पे का लाभ मिलना चाहिए। यह मांग कई वर्षों से अलग-अलग मंचों पर उठती रही है और पुलिसकर्मियों के परिजन तथा सामाजिक संगठन भी पहले इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर चुके हैं।

वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले 2001 बैच के पात्र पुलिसकर्मियों को 4600 ग्रेड पे देने की घोषणा की थी। अन्य मामलों को वेतन विसंगति समिति के सामने रखे जाने की बात भी कही गई थी।

हालांकि घोषणा के क्रियान्वयन और अन्य बैचों की पात्रता को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। मई 2026 में भी वर्ष 2001 और 2002 बैच के पुलिस कांस्टेबलों के लिए 4600 ग्रेड पे की मांग उठाई गई थी। इससे साफ है कि इस मुद्दे पर पुलिसकर्मियों और सरकार के बीच स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।

अधिकार मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार को पात्रता, सेवा अवधि और ग्रेड पे से संबंधित स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूर्व घोषणाओं और लंबित मामलों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाए।

मार्च में शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों की भागीदारी नजर नहीं आई। हालांकि उनकी अनुपस्थिति के कारण और आयोजन में शामिल पुलिस परिवारों की कुल संख्या का कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

मार्च के दौरान राजनीतिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण ग्रेड पे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया। अलग-अलग संगठनों ने इसे पुलिसकर्मियों के आर्थिक हित और सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए सरकार से जल्द समाधान की मांग की।

फिलहाल राज्य सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से इस प्रदर्शन के बाद कोई नया निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार 2001 बैच से जुड़ी पुरानी घोषणा, अन्य बैचों की मांग और ग्रेड पे की पात्रता पर क्या रुख अपनाती है।

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