हल्द्वानी में खुली उत्तराखंड की पहली GI product गैलरी, एक छत के नीचे दिखेंगे 30 से अधिक स्थानीय उत्पाद

उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े GI टैग प्राप्त उत्पाद अब एक ही स्थान पर अपनी कहानी के साथ देखे जा सकेंगे। यह पहल स्थानीय पहचान, पारंपरिक ज्ञान और क्षेत्रीय विरासत को करीब से समझने का नया अवसर देती है। जानिए गैलरी में किन उत्पादों को शामिल किया गया है और यह प्रयास क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Display section inside Uttarakhand's first GI Products Gallery in Haldwani showcasing GI-registered handicrafts, traditional products and local heritage items.

हल्द्वानी, 14 जुलाई। उत्तराखंड के भौगोलिक संकेत यानी जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित करने के लिए हल्द्वानी में प्रदेश की पहली जीआई उत्पाद गैलरी खोली गई है। उत्तराखंड वन प्रशिक्षण अकादमी में तैयार इस गैलरी में राज्य के 30 से अधिक कृषि, हस्तशिल्प, पारंपरिक खाद्य और अन्य स्थानीय उत्पादों को जगह दी गई है।

गैलरी को तैयार करने में करीब तीन महीने लगे। इसे विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्रशिक्षणार्थियों और अन्य आगंतुकों के लिए खोला गया है। इसके माध्यम से लोगों को उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े जीआई उत्पादों और उनकी स्थानीय पहचान से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।

गैलरी में तेजपात, मुनस्यारी का सफेद राजमा, कुमाऊं च्यूरा तेल, अल्मोड़ा लाखौरी मिर्च, बेरीनाग चाय और काला भट्ट जैसे कृषि और खाद्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा बेडू, रामनगर की लीची और रामगढ़ के आड़ू को भी जगह दी गई है।

जल्दी खराब होने वाले फलों और खाद्य उत्पादों को लंबे समय तक प्रदर्शित रखने के लिए विशेष संरक्षण व्यवस्था की गई है। इससे आगंतुक अलग-अलग मौसमों में भी इन उत्पादों को देख सकेंगे।

हस्तशिल्प से जुड़े खंड में ऐपण कला, चमोली के रम्माण मुखौटे, ताम्र उत्पाद और रिंगाल शिल्प रखे गए हैं। नैनीताल की मोमबत्तियां और बुरांश का शरबत भी गैलरी में प्रदर्शित उत्पादों का हिस्सा हैं।

जीआई टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है, जिसकी विशेष गुणवत्ता, पहचान या प्रतिष्ठा किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। इससे उस उत्पाद की स्थानीय पहचान को कानूनी मान्यता मिलती है और उसके नाम के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलती है।

उत्तराखंड के कई पारंपरिक उत्पाद सीमित क्षेत्रों में तैयार होते हैं और सामान्य बाजार में उनकी जानकारी कम लोगों तक पहुंच पाती है। एक ही स्थान पर इन उत्पादों को प्रदर्शित करने से आगंतुकों को राज्य की कृषि, शिल्प और स्थानीय परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा।

अधिकारियों को उम्मीद है कि गैलरी के माध्यम से राज्य के किसानों, कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों को अधिक पहचान मिल सकेगी और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा में मदद मिलेगी। हालांकि गैलरी में सीधे उत्पादों की बिक्री होगी या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

हल्द्वानी में शुरू हुई यह गैलरी उत्तराखंड की स्थानीय विरासत को एक छत के नीचे प्रस्तुत करने का नया प्रयास है। आने वाले समय में यहां प्रदर्शित उत्पादों की संख्या और सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

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