देहरादून, 22 अगस्त। उत्तराखंड में बड़ी मात्रा में चीनी खरीदने और इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों व संस्थानों के लिए स्टॉक रखने के नियम सख्त होने जा रहे हैं। सितंबर से ऐसे बड़े उपभोक्ता अपनी जरूरत के केवल 15 दिन के बराबर चीनी ही अपने पास रख सकेंगे। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस संबंध में सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
नया नियम 1 सितंबर 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। यह सीमा उन बड़े उपभोक्ताओं पर लागू होगी, जिनकी पिछले एक साल की औसत मासिक चीनी खपत कम से कम 10 मीट्रिक टन रही है। मौजूदा महीने की खपत को इस औसत की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
इस श्रेणी में मिठाई और कन्फेक्शनरी बनाने वाले कारोबारी, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और दूसरे ऐसे संस्थान आ सकते हैं, जो अपने कारोबार या उत्पादन में बड़ी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें अब लंबे समय के लिए जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके रखने की अनुमति नहीं होगी।
उत्तराखंड के खाद्य आयुक्त बीएल राणा के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश की जानकारी प्रदेश के सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को दे दी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में नियम का पालन सुनिश्चित कराने और चीनी के स्टॉक की निगरानी करने को कहा गया है।
नई व्यवस्था में चीनी मिलों की ओर से बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का भी सत्यापन किया जाएगा। किसी खरीदार की वास्तविक खपत का आकलन GST रिटर्न और चीनी से संबंधित HSN कोड के रिकॉर्ड के आधार पर किया जा सकेगा।
जिला स्तर पर केवल कागजी रिकॉर्ड की जांच ही नहीं होगी। अधिकारियों को जरूरत के अनुसार गोदामों और दूसरे स्थानों पर जाकर उपलब्ध चीनी का भौतिक सत्यापन करने की व्यवस्था भी करने को कहा गया है। इससे रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और मौके पर मौजूद चीनी की मात्रा का मिलान किया जा सकेगा।
हालांकि, 15 दिन वाली यह सीमा हर संस्था पर लागू नहीं होगी। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन और स्थानीय निकायों से जुड़े संस्थानों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
सरकार का उद्देश्य बड़ी मात्रा में चीनी जमा करके बाजार में आपूर्ति प्रभावित करने की संभावना को कम करना है। स्टॉक की सीमा और नियमित जांच से यह पता लगाना आसान होगा कि कोई बड़ा उपभोक्ता अपनी वास्तविक जरूरत से ज्यादा चीनी तो जमा नहीं कर रहा है।
बड़े उपभोक्ताओं को सितंबर से अपने स्टॉक और खरीद का रिकॉर्ड सही रखने की जरूरत होगी। निर्धारित सीमा से अधिक चीनी रखने पर संबंधित अधिकारियों की ओर से नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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