ऋषिकेश में अभी राफ्टिंग के लिए करना होगा इंतजार, गंगा में बढ़ते जलस्तर के कारण 1 सितंबर से शुरू नहीं होगा संचालन

राफ्टिंग से जुड़े गाइड, कैंप, होटल और स्थानीय परिवहन कारोबार के लिए सीजन की शुरुआत का समय अहम है, वहीं यात्रियों के लिए भी बुकिंग से पहले संचालन की स्थिति जानना जरूरी होगा। आगे जानिए किन परिस्थितियों में रूटों को दोबारा अनुमति मिलेगी, पिछले सीजन में कितने पर्यटक पहुंचे थे और इस देरी का स्थानीय पर्यटन कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है।
Rafting boats waiting on the Ganga riverbank in Rishikesh during high water levels

ऋषिकेश, 31 अगस्त। ऋषिकेश में गंगा राफ्टिंग का इंतजार कर रहे पर्यटकों को अभी कुछ दिन और रुकना पड़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में मानसून ब्रेक खत्म होने के बावजूद 1 सितंबर से राफ्टिंग संचालन शुरू होने की स्थिति नहीं बन पाई है।

ऋषिकेश में मानसून के दौरान जुलाई और अगस्त में राफ्टिंग गतिविधियां बंद रहती हैं। सामान्य परिस्थितियों में सितंबर की शुरुआत से नया राफ्टिंग सीजन शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार गंगा का जलस्तर अभी सुरक्षित सीमा तक नहीं पहुंचा है।

राफ्टिंग शुरू करने से पहले गंगा के जलस्तर, बहाव और राफ्टिंग रूट की स्थिति की तकनीकी जांच की जाएगी। नदी की परिस्थितियां सुरक्षित पाए जाने और जरूरी अनुमति मिलने के बाद ही पर्यटकों के लिए राफ्टिंग दोबारा शुरू की जाएगी।

“गंगा नदी में राफ्टिंग का संचालन तो अभी संभव नहीं है। जब तक गंगा का जलस्तर कम नहीं होता तब तक इंतजार ही करना पड़ेगा।”
— सोबन सिंह राणा, जिला पर्यटन अधिकारी, टिहरी

मानसून के दौरान गंगा में जलस्तर बढ़ने के साथ बहाव भी तेज हो जाता है। ऐसे हालात में राफ्टिंग जोखिमपूर्ण हो सकती है, इसलिए सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जलस्तर सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।

ऋषिकेश में मरीन ड्राइव, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी, क्लब हाउस और कौड़ियाला जैसे अलग-अलग राफ्टिंग रूट संचालित किए जाते हैं। इन रूटों की दूरी और कठिनाई अलग-अलग होती है और बड़ी संख्या में पर्यटक हर साल इन पर राफ्टिंग के लिए पहुंचते हैं।

इससे पहले 30 जून के बाद मानसून को देखते हुए ऋषिकेश में राफ्टिंग गतिविधियां बंद कर दी गई थीं। जून में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, पिछले राफ्टिंग सीजन में करीब 3.80 लाख पर्यटकों ने गंगा में राफ्टिंग की थी।

ऋषिकेश में राफ्टिंग से राफ्टिंग कंपनियों और गाइडों के साथ होटल, कैंप, वाहन चालक और दूसरे स्थानीय पर्यटन कारोबार भी जुड़े हैं। ऐसे में राफ्टिंग सीजन देर से शुरू होने पर इन कारोबारों पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल पर्यटकों को अपनी राफ्टिंग यात्रा की योजना बनाने से पहले संचालन शुरू होने की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा। गंगा का जलस्तर सुरक्षित पाए जाने और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही राफ्टिंग को हरी झंडी दी जाएगी।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड की भागीरथी बिष्ट ने हैदराबाद मैराथन में रचा इतिहास, 42.195 किमी दौड़ में जीता सिल्वर मेडल; तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने किया सम्मानित

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड का ड्याली सेरा ट्रेक बना ‘ट्रेक ऑफ द ईयर 2026’, पहले 300 ट्रेकर्स को मिलेगा सब्सिडी का लाभ