देहरादून, 16 अक्टूबर। दिव्यांग पेंशन के लिए अब 18 साल की उम्र का इंतजार नहीं करना होगा। केंद्र सरकार ने न्यूनतम उम्र की शर्त खत्म कर दी है। नई व्यवस्था के दिशा-निर्देश जारी होने के बाद उत्तराखंड में भी योग्यता के नियमों में आने वाले दिव्यांग बच्चों को इसका लाभ मिल सकेगा।
केंद्रीय कैबिनेट ने 14 अक्टूबर को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत दिव्यांग पेंशन के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है। अभी तक केंद्रीय योजना में पेंशन के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल थी। नए नियमों में यह शर्त हटा दी गई है।
इसके साथ ही केंद्रीय योजना में दिव्यांगता की योग्यता सीमा 80% से घटाकर 40% कर दी गई है। उत्तराखंड में 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले लोगों को राज्य की दिव्यांग पेंशन योजना का लाभ पहले से दिया जा रहा है।
उत्तराखंड में फिलहाल योग्यता के नियमों में आने वाले दिव्यांग लोगों को हर महीने 1,500 रुपये पेंशन दी जाती है। मौजूदा नियमों के अनुसार इसके लिए उम्र 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए।
वहीं 18 साल से कम उम्र के 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए राज्य में अलग से दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना चलती है। इसके तहत योग्यता के नियमों में आने वाले माता-पिता या अभिभावक को हर महीने 700 रुपये दिए जाते हैं।
नई केंद्रीय व्यवस्था लागू होने के बाद बच्चों को दिव्यांग पेंशन का लाभ किस प्रक्रिया से मिलेगा और राज्य की मौजूदा बाल दिव्यांग अनुदान योजना में क्या बदलाव होगा, यह नए दिशा-निर्देश जारी होने के बाद साफ होगा।
केंद्र सरकार ने दिव्यांग पेंशन में अपनी सहायता राशि भी बढ़ाई है। 0 से 79 साल के लाभार्थियों के लिए केंद्रीय सहायता 300 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये और 80 साल या उससे अधिक उम्र वालों के लिए 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये प्रतिमाह की गई है।
समाज कल्याण विभाग के पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 90,750 लोग दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रहे हैं। इनमें हरिद्वार में 13,818, ऊधम सिंह नगर में 12,909 और देहरादून में 11,877 लाभार्थी बताए गए हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार बदले हुए योग्यता नियम, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़े दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी और लागू किए जाएंगे। इसके बाद उत्तराखंड में भी नई व्यवस्था के तहत बच्चों को पेंशन देने की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
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